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हमारे ऊपर बोझ है यह कहकर बच नहीं सकती सरकार! …अस्पताल मौत मामले में हाई कोर्ट की ईडी सरकार को दो टूक

सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र के नांदेड़ और छत्रपति संभाजीनगर के सरकारी अस्पतालों में हाल ही में कई मरीजों की मौत हुई है। मुंबई हाई कोर्ट ने इस मामले पर स्वत: संज्ञान लिया है। हाई कोर्ट ने कहा है कि महाराष्ट्र सरकार, सरकारी अस्पतालों में मरीजों की हुई मौत से बच नहीं सकती है। दोनों शहरों में दर्जनों मरीजों के जान गंवाने के मामले सामने आए हैं।
चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय ने कहा, ‘आप यह कहकर बच नहीं सकते हैं कि हमारे ऊपर बोझ है, ऐसे शब्दों में हाई कोर्ट ने ईडी सरकार को दो टूक कहा है। आप एक राज्य हैं। आप अपनी जिम्मेदारियों को प्राइवेट प्लेयर को नहीं सौंप सकते हैं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘इसे कैसे मजबूत करें? इस बात की जानकारी पेपर में मौजूद हैं, लेकिन अगर वह जमीन तक नहीं पहुंच रहा है तो फिर कोई मतलब नहीं हुआ।’ दरअसल, हाई कोर्ट की तरफ से यह फटकार ऐसे समय पर लगाई गई है, जब सरकार ने दवाओं, बेड आदि के कम होने की बात कही।
सरकार से मांगा गया
स्वास्थ्य पर खर्च का ब्यौरा
मुंबई हाई कोर्ट ने बुधवार (४ अक्टूबर) को अस्पतालों में मरीजों की हुई मौतों का स्वत: संज्ञान लिया। डॉक्टरों का कहना था कि इन मौतों की वजह बेड, स्टाफ और जरूरी दवाओं की कमी है। हालांकि, अदालत ने साफ कर दिया कि इन वजहों को स्वीकार नहीं किया जा सकता है।
कोर्ट ने पूछे ये सवाल
मुंबई हाई कोर्ट ने सरकारी वकील से पूछा कि मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर के ९७ स्वीकृत पद हैं, लेकिन फिलहाल वहां सिर्फ ४९ ही तैनात हैं। आप उसके बारे में क्या कहेंगे? महाराष्ट्र सरकार के वकील का कहना है कि महाराष्ट्र सरकार का स्वास्थ्य सेवा विभाग रिक्तियों को लेकर सकारात्मक है और इन्हें नवंबर तक भर दिया जाएगा। हाई कोर्ट ने मेडिसिन प्रोक्योरमेंट बोर्ड के सीईओ की अनुपलब्धता पर भी सवाल उठाए। महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश एजी ने कहा कि एक व्यक्ति के पास अतिरिक्त प्रभार है। एचसी ने कहा कि दवा खरीद बोर्ड का एक पूर्णकालिक और स्वतंत्र सीईओ होना चाहिए।
हाई कोर्ट की रिपोर्ट में क्या कहा गया?
नांदेड़ अस्पताल में हुई मौतों के मामले में एचसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ मरीज बच नहीं सके, क्योंकि उन्हें निजी अस्पतालों द्वारा बहुत देर से रेफर किया गया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सभी दवाएं और अन्य आपूर्तियां उपलब्ध थीं और प्रोटोकॉल के अनुसार, प्रशासित की गर्इं। रिपोर्ट चिकित्सा आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, नांदेड़ मेडिकल कॉलेजों में अधिक जनशक्ति और एक नए एनआईसीयू की आवश्यकता को रेखांकित करती है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ९७ पदों में से केवल ४९ ही भरे हुए हैं।

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