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सरकार अपने प्रचार में कर रही है करोड़ों रुपए बर्बाद! … आरटीआई से हुआ खुलासा

सामना संवाददाता / मुंबई
अगस्त महीना खत्म होनेवाला है और महाराष्ट्र के ज्यादातर राज्यों में अभी भी अच्छी बारिश नहीं हुई है। महाराष्ट्र के अधिकतर राज्यों में सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है और हालत ये है कि अभी से ही गांवों में पीने के लिए और अन्य जरूरतों के लिए टैंकर से पानी पहुंचाया जा रहा है। पिछले साल जहां १० गांवों और १९ बस्तियों में टैंकर से पानी पहुंचाया जा रहा था, वही आज की स्थिति में १,४०३ बस्तियों में और ३६३ गावों में टैंकर से पानी पहुंचाया जा रहा है, ऐसी जानकारी सूचना के अधिकार से प्राप्त हुई है।
मानसून का आधा समय समाप्त हो गया है और बचे हुए मानसून में बारिश अच्छी होगी इसकी कोई उम्मीद नहीं है। अल नीनो का प्रभाव साफ रूप से मानसून पर दिखाई दे रहा है। महाराष्ट्र में ट्रिपल इंजिन की सरकार है फिर भी सूखे जैसे संकट को गंभीरता से न लेते हुए सरकार के प्रचार अपने लिए जगह-जगह ‘सरकार आपल्या दारी’ कार्यक्रम आयोजित कर रही है और इस कार्यक्रम में राज्य के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और सरकार के मंत्री शामिल होते हैं।
एक अनुमान के अनुसार ‘सरकार आपल्या दारी’ कार्यक्रम के लिए १०० करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है। जोड़-तोड़ की सरकार होने के कारण आम जनता के बीच अपनी छवि सुधारने के लिए और जनता के साथ संपर्क बढ़ाने के उद्देश्य से ‘सरकार आपल्या दारी’ कार्यक्रम आयोजित करके सरकारी तिजोरी खाली कर रही है। सूखे से संबंधित किसी भी उपाय योजना पर राज्य सरकार काम नही कर रही है, ऐसे में आम जनता का यही कहना है, ‘सरकार आपला दारी, दुष्काल लय भारी’। जब भीषण सूखा पड़ा हुआ है तो ऐसे में सरकार को लोगों को सुविधा और सूखे से निपटने के लिए सरकारी रकम खर्च करनी चाहिए, लेकिन सरकार अपने प्रचार के लिए जनता के करोड़ों रुपए सरकारी कार्यक्रमों में बर्बाद कर रही है।

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