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सरकार डरी, नहीं दी मोर्चे की अनुमति… धारावीकरों का दृढ़ संकल्प… अडानी के खिलाफ हर हाल में निकलेगा… लाखों का मोर्चा!

सामना संवाददाता / मुंबई

मुंबई में उद्योग व रोजगार के महत्वपूर्ण केंद्र और एशिया की सबसे बड़ी झोपड़पट्टी धारावी का पुनर्विकास के नाम पर ‘टीडीआर’ घोटाला करके ‘अडानी’ के गले में डालने की ‘घाती’ सरकार की साजिश को नाकाम करने के लिए धारावीकर एकजुट हुए हैं। इस लड़ाई में शिवसेना पूरी ताकत के साथ धारावीकरों के पीछे खड़ी है और शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में शनिवार १६ दिसंबर को ‘अडानी’ के बांद्रा- कुर्ला कांप्लेक्स स्थित कार्यालय पर लाखों लोगों का सर्वदलीय महामोर्चा पहुंचनेवाला है। इस मोर्चे के कारण सरकार की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई है। इसी कारण पुलिस की तरफ से मोर्चा को अनुमति देने में टालमटोल की जा रही है। हालांकि, ‘कुछ भी हुआ तो भी मोर्चा निकलेगा ही’, ऐसा कल सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने पुलिसवालों को दृढ़ता से कहा।
कल निकलनेवाले इस मोर्चे के लिए शिवसेना ने जोरदार तैयारी की है। इसके साथ ही लाखों धारावीकर भी तैयार हो गए हैं। धारावी के नुक्कड़ों पर ३०० से अधिक सभाएं ली जा रही हैं, जिसे लेकर धारावीकरों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी समेत १५ से अधिक दल व संस्थाएं इस विराट मोर्चे में शामिल होंगे। शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में यह प्रचंड मोर्चा कल ‘अडानी’ पर धावा बोलेगा।

राज्य सरकार द्वारा धारावी पुनर्विकास परियोजना को स्पेशल परियोजना के रूप में घोषित करने के बावजूद धारावीकरों को केवल ३०० फुट का आवास देने की साजिश की गई है। इसके साथ ही विकासक ‘अडानी’ पर रियायतों की बौछार की गई है। सरकार ने बिना कोई आपत्ति और सुझाव मंगाए सीधे विकास की गारंटी दी है। खास बात यह है कि ‘अडानी’ को मुंबई में कहीं भी यहां के ‘टीडीआर’ का उपयोग करने की अनुमति दी गई है, इसलिए यदि अन्य विकासक पहली बार ‘टीडीआर’ का उपयोग करना चाहते हैं, तो उसे अडानी से लेना होगा। ऐसे में ‘अडानी’ के लिए मुंबई को निगलने का रास्ता साफ हो जाएगा। इसके अलावा अभी तक यहां की ५८ हजार झोपड़ियों का ही सर्वे हो सका है और ८० से ९० हजार झोपड़ाधारक अभी भी पात्रता और अपात्रता की सीमा रेखा पर हैं। ऐसे में सवाल खड़ा हो गया है कि क्या यहां कई वर्षों से रह रहे हजारों भूमिपुत्र धारावीकरों को बेदखल करने की साजिश हो रही है? इसके अलावा ‘अडानी’ द्वारा प्रस्तावित पुनर्विकास के बारे में धारावीकरों को कोई जानकारी नहीं दी जा रही है। इससे धारावीकरों में सरकार और ‘अडानी’ के खिलाफ काफी असंतोष है। यही कारण है कि धारावीकरों के अधिकारों के लिए कल शिवसेना इतना विशाल मोर्चा निकाल रही है।
ये दल, संगठन होंगे शामिल
शिवसेना, कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, समाजवादी पार्टी, बहुजन पार्टी, आम आदमी पार्टी, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले), शेतकरी कामगार पक्ष, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पक्ष, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, जनता दल (सेक्युलर), आजाद समाज पार्टी, सर्व समाज जनता पार्टी, धारावी भाडेकरू महासंघ और धारावी की सभी सहकारी गृहनिर्माण संस्थाएं, चाल कमिटियां, संस्था, संगठन, मंडल शामिल होंगे। इस तरह की जानकारी शिवसेना के पूर्व विधायक बाबूराव माने ने दी।
ये हैं मांगें
धारावी के सभी निवासी, अनिवासी झोपड़ाधारकों को पात्र करके उनका धारावी में ही पुनर्वासन करो।
निवासी झोपड़ाधारकों को ५०० वर्ग फुट के घर नि:शुल्क दो। ‘टीडीआर’ के लिए सरकार द्वारा खुद की कंपनी नियुक्त की जाए।
मनपा संपत्तिकर विभाग की चालों और इमारतों में रहने वाले लोगों को ७५० वर्ग फुट का नि:शुल्क घर दो।
नए सिरे से सर्वेक्षण करके सूची घोषित करो। निवासी, अनिवासी घोषित करने के बाद ही परियोजना शुरू करो।
परियोजना का स्वरूप झोपड़ाधारकों को समझने के लिए पहले मास्टर प्लान घोषित करके सविस्तार जानकारी दो।
म्हाडा, सिडको जैसे सक्षम प्राधिकारी द्वारा ‘बीडीडी’ की तर्ज पर पुनर्विकास करो, क्योंकि जनता की धारणा है कि ‘अडानी’ एक विश्वसनीय विकासक नहीं है।
शाहूनगर लेबर वैंâप के निवासियों को ७५० वर्ग फुट की जगह उपलब्ध कराई जाए।
पांच हजार उद्योग, १५ हजार पैâक्टरीज, ढाई लाख रोजगार!
धारावी न केवल एशिया की सबसे बड़ी झोपड़पट्टी है, बल्कि मुंबई में उद्योग और रोजगार का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी है। लगभग ५,००० उद्योगों, १५,००० छोटी और बड़ी पैâक्टरियां, ढाई लाख लोगों को रोजगार देनेवाली और देश-विदेश में कई उद्योगों को कच्चे माल समेत तैयार वस्तुओं की आपूर्ति करनेवाली धारावी मुंबई का आर्थिक केंद्र है। धारावी यानी मुंबई को वित्तीय सहायता देनेवाला र्इंधन है। धारावी के महत्व को बताने वाला टीजर भी शिवसेना की ओर से जारी किया गया है। इसे पूरी मुंबई में तूफानी प्रतिसाद मिल रहा है और शिवसेना के मोर्चे की जमकर चर्चा हो रही है।

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