मुख्यपृष्ठनए समाचारमुंबईकरों का स्वास्थ्य हो सकता है  कभी नरम-कभी गरम!

मुंबईकरों का स्वास्थ्य हो सकता है  कभी नरम-कभी गरम!

सामना संवाददाता / मुंबई  

डॉक्टरों ने दी बचकर रहने की सलाह

महाराष्ट्र के कई हिस्सों में तापमान कम होने लगा है और ठंड पड़ने लगी है। मुंबई में भी इस समय रात के समय हल्की सर्दी और दिन में गर्मी का एहसास हो रहा है। इस बीच मौसम विभाग ने संभावना जताते हुए कहा है कि मुंबई में न्यूनतम तापमान २ से ३ डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है। उत्तरी हवाओं के कारण मुंबई में रात का तापमान गिरकर १८ से १९ डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है। ऐसे में मुंबईकरों को रात में ठंड का अनुभव होगा। मौसम की इस प्रतिकूल अवस्था को देखते हुए डॉक्टरों का कहना है कि ऐसा मौसम स्वास्थ्य के लिए ‘कभी नरम तो कभी गरम’ होते हैं, इसलिए आम लोगों को खासकर बच्चों और बुजुर्गों को बचकर रहना चाहिए। उल्लेखनीय है कि मुंबई में अधिकतम तापमान अभी भी अधिक है। मुंबईकरों को सुबह कोहरे और दोपहर में चिलचिलाती गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। उपनगरों में न्यूनतम तापमान २१ से २२ डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। क्षेत्रीय मौसम विभाग के मुताबिक, १३ और १४ दिसंबर को रात का तापमान गिरकर २० डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाएगा। इसके साथ ही १५, १६ दिसंबर को तापमान १९ डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा। इस बीच उत्तर से मुंबई की ओर आनेवाली ठंडी हवाओं का प्रवाह बढ़ जाएगा और इससे मुंबई में रात के तापमान में गिरावट होने की संभावना है।
दिन का तापमान रहेगा अधिक
मौसम विभाग के अनुसार, मुंबईकरों को रात में गुलाबी ठंड का अनुभव होगा, जबकि दिन का तापमान ३० डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहेगा। साथ ही आर्द्रता ६५ प्रतिशत से घटकर ५५ प्रतिशत तक रह सकती है। इस बीच मुंबईकरों को उमस से राहत मिलेगी, लेकिन दिन का तापमान ३१ से ३२ डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा।
हो सकती है स्वास्थ्य संबंधी परेशानी
मौसम में आए इस प्रतिकूल बदलाव का असर स्वास्थ्य पर भी हो सकता है। दिन की गर्मी और रात की ठंडक लोगों की सेहत को बिगाड़ सकती है। डॉक्टरों ने बताया खुले मौसम में गर्माहट रहती है, लेकिन कमरे या छाया में आने पर ठंडक का अहसास होता है। ऐसे में सर्दी, जुकाम, हाथ-पैर में दर्द, थकान जैसी परेशानी सामने सकती है। इससे बचने के लिए ठंडे से एकदम गर्म वातावरण और गर्म से एकदम ठंडक में जाने से बचना चाहिए। ऐसे मौसम में मच्छर भी बढ़ जाते है, इसलिए वायरल फीवर और मलेरिया से भी बचने की जरूरत है।

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