मुख्यपृष्ठनए समाचारजन्मभूमि मंदिर में स्थापित होगी योगिराज द्वारा बनी रामलला की मूर्ति

जन्मभूमि मंदिर में स्थापित होगी योगिराज द्वारा बनी रामलला की मूर्ति

मनोज श्रीवास्तव / लखनऊ

कर्नाटक के मशहूर मूर्तिकार अरुण योगीराज की मूर्ति रामलला के दरबार में विराजेगी। अरुण रोजाना 18 घंटे काम करते थे, करीब सात महीने में उन्होंने रामलला की अचल मूर्ति गढ़ी है। रोजाना काम शुरू करने से पहले राम जी की आरती-पूजा व हनुमान चालीसा का पाठ करते थे। 15-15 दिन तक परिवार से बात नहीं करते थे। सात महीने के कठिन परिश्रम ने अरुण योगीराज का मान आज पूरे विश्व में बढ़ा दिया है। अरुण योगीराज मूलत: कर्नाटक के मैसूर से हैं। उनके परिवार में एक से बढ़ कर एक मूर्तिकार रहे हैं। उनकी पांच पीढ़ियां मूर्ति बनाने या तराशने का काम कर रही हैं। अरुण योगीराज के दादा बसवन्ना शिल्पी भी जाने-माने मूर्तिकार थे। उन्हें मैसूर के राजा का संरक्षण हासिल था। अरुण को बचपन से ही मूर्ति बनाने का शौक था। अरुण ने एमबीए किया है। इसके बाद वो एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करने लगे, लेकिन मूर्तिकला को नहीं भूल पाए। आखिरकार साल 2008 में जॉब छोड़कर उन्होंने मूर्तिकला में कैरियर बनाने का निर्णय लिया। उनका निर्णय सफल रहा। वे देश के जाने माने मूर्तिकार बन गए।

चयनित मूर्ति की 9 विशेषताएं
1-श्याम शिला की आयु हजारों साल होती है, यह जल रोधी होती है।
2-चंदन, रोली आदि लगाने से मूर्ति की चमक प्रभावित नहीं होगी।
3-पैर की अंगुली से ललाट तक रामलला की मूर्ति की कुल ऊंचाई 51 इंच है।
4-चयनित मूर्ति का वजन करीब 150 से 200 किलो है।
5-मूर्ति के ऊपर मुकुट व आभामंडल होगा।
6-श्रीराम की भुजाएं घुटनों तक लंबी हैं।
7-मस्तक सुंदर, आंखे बड़ी और ललाट भव्य है।
8-कमल दल पर खड़ी मुद्रा में मूर्ति, हाथ में तीर व धनुष होगा।
9-मूर्ति में पांच साल के बच्चे की बाल सुलभ कोमलता झलकेगी।

इससे पहले योगीराज द्वारा बनायी गयी मूर्तियां जिनमें
केदारनाथ में आदि शंकराचार्य की 12 फीट ऊंची प्रतिमा लगी है।
मैसूर में स्वामी रामकृष्ण परमहंस की प्रतिमा, मैसूर के राजा की 14़ 5 फीट ऊंची सफेद अमृत शिला प्रतिमा,
मैसूर के चुंचनकट्टे में हनुमान जी की 21 फीट ऊंची प्रतिमा, संविधान निर्माता डॉ़ बीआर आंबेडकर की 15 फीट ऊंची प्रतिमा प्रमुख है।

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