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‘घाती’ सरकार की नीयत है खराब, रक्तदान सब्सिडी में कोई बढ़ोतरी नहीं! … ब्लड डोनर को दे रही केवल चाय और दो बिस्कुट

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
ब्लड डोनरों के भरोसे पूरे राज्य में रक्तदान आंदोलन खड़ा हुआ, जो अब एक वट वृक्ष के रूप में परिवर्तित हो गया है। प्रदेश में लोग खुद ही आगे आकर ब्लड डोनेट करने लगे हैं, जिस कारण स्वैच्छिक रक्तदाताओं की संख्या बढ़ी है। लेकिन इन रक्तदाताओं के प्रति ‘घाती’ सरकार की नीयत खराब है, क्योंकि उन्हें ब्लड डोनेशन के बाद केवल १० रुपए की आधी चाय और दो बिस्कुट दिए जाते हैं। हालांकि, रक्तदाताओं के लिए जारी शासनादेश में साफ उल्लेखित है कि उनके नाश्ते पर २५ रुपए खर्च किए जाने चाहिए, लेकिन उन्हें रक्तदान के बाद केवल चाय और बिस्कुट से निपटा दिया जाता है। सबसे खास बात यह है कि रक्तदान सब्सिडी में भी बीते कई सालों से कोई भी बढ़ोतरी नहीं हुई है, जो ‘घाती’ सरकार के कामकाज पर उंगली उठा रही है।
अनुदान में कोई बढ़ोतरी नहीं 
उल्लेखनीय है कि पहले राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन से स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल के पास प्रति स्वैच्छिक रक्तदाता ५८.३४ रुपए का फंड आता था। काउंसिल १८.४० रुपए काटकर बाकी ४० रुपए अधिकृत ब्लड बैंकों को दे देती थी। ब्लड बैंकों की तरफ से ब्लड डोनरों के नाश्ते पर २५ रुपए खर्च करती है, वहीं बहुत पहले से ही रक्तदान शिविरों के आयोजन पर १५ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। फिलहाल, अभी तक इस अनुदान में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। यही कारण है कि आज भी स्वैच्छिक रक्तदाताओं को १० रुपए के नाश्ते पर बुलाया जाता है। सूत्रों के मुताबिक, खास बात यह है कि कोरोना के बाद से मौजूदा ‘घाती’ सरकार के राज में सब्सिडी ही नहीं मिल रही है। इससे यह जानकारी सामने आई कि स्थानीय स्वास्थ्य संगठनों के ब्लड बैंक स्वैच्छिक रक्तदाताओं के लिए नाश्ता उपलब्ध करा रहे हैं। राज्य में २९९ ब्लड बैंक हैं। इनमें से कई अब बंद हो चुके हैं। ब्लड बैंकों में हर साल लगभग १४ लाख यूनिट खून एकत्र किया जाता है। इन दानदाताओं के नाश्ते पर करीब ३५ करोड़ रुपए खर्च होते हैं। शेष १५ करोड़ रुपए शिविर के दौरान रक्तदाताओं को दिए जानेवाले प्रमाणपत्र, बैच, स्मृति चिह्न, परिवहन लागत, बैनर पर खर्च किए जाते हैं।

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