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मौत का सफर! …फेसबुक से फंस रहे पाकिस्तानी

खुलेआम हो रही मानव तस्करी
मनमोहन सिंह
`यूसुफ’ की नजर अपने मोबाइल फोन से हट नहीं रही थी। फेसबुक पर दिख रहे वीडियो को देखकर वह खुश हो रहा था। वीडियो पर एक शख्स बता रहा था कि वह इस वक्त इटली में है और एक शानदार जिंदगी बिता रहा है। पल भर के लिए उसने महसूस किया कि वह भी इटली में ही है। वीडियो खत्म हुआ वह असल जिंदगी में लौट आया…
यूसुफ ने फटाफट फेसबुक में दिए व्हाट्सएप नंबर पर मैसेज भेजा। वह जवाब का इंतजार कर रहा था। उसका दिल जोरों से धड़क रहा था। ५ मिनट बीते होंगे उसके पास जवाब आ गया। अब उसे पैसे जमा करने थे ताकि इटली पहुंच जाए। उससे सवाल किया गया कि वह इटली नाव से जाएगा या सड़क के रास्ते?
उसने अपने दोस्त मोहम्मद से बातचीत की। मोहम्मद ने उसे हिदायत देते हुए कहा टैक्सी ठीक है। नाव पलट गई तो क्या होगा? उसने यूसुफ को बताया कि वैâसे पिछले दिनों एक नाव पलट गई थी उसमें कई लोग मर गए थे शायद ग्रीस में! यूसुफ घबरा गया उसने व्हॉट्सऐप पर मैसेज किया टैक्सी। वह सड़क के रास्ते इटली पहुंचने वाला था। उसे बताया गया कि वह आराम से २० दिन में पहुंच जाएगा, उसने एजेंट को रुपए दे दिए। दो हफ्ते के बाद उसका जाना तय हुआ। तयशुदा वक्त पर वह एजेंट के दफ्तर पहुंचा। वहां पर उसकी तरह काफी लोग थे, जो अलग-अलग देश में जानेवाले थे। कुछ लोग नाव के जरिए जानेवाले थे और कुछ लोग सड़क के जरिए। उन्हें एक वैन में बिठा दिया गया। उनके पास कुछ पैसे थे। ठंड से बचने के लिए कपड़े थे और कुछ खाने-पीने का सामान। आंखों में सुनहरे ख्वाब लिए यूसुफ जैसे कई लोग अपने मंजिल की ओर निकल पड़े। यूसुफ की टीम लीबिया से होते हुए जानेवाली थी। कुछ दिन अच्छे से कटे। यूसुफ को इस बात की कतई खबर नहीं थी कि लीबिया से होकर इटली जाना बेहद खतरनाक है और लीबिया से इटली जाने के लिए दो ही रास्ते हैं हवाई जहाज से या फिर पानी के जहाज से!
लीबिया पहुंचते ही उनको अगवा कर लिया गया। सुनहरे ख्वाब देखनेवाले उन लोगों की जिंदगी जहन्नुम बन कर रह गई थी। तकरीबन ३ महीने बीत गए रिहाई के लिए बातचीत चलती रही आखिरकार बात ७ लाख रुपए पर खत्म हुई। इसी साल जून महीने में ग्रीस के पास समंदर में, लीबिया से प्रवासियों को ले जा रहे एक जहाज के डूबने से पाकिस्तान में भारी बवाल मचा था। बताया जाता है कि जहाज पर सवार पाकिस्तानियों की संख्या ४०० तक थी। ये सभी लोग गैर-कानूनी ढंग से पाकिस्तान से निकले थे।

जैसे-तैसे उसके परिवार वालों ने पैसे जमाकर यूसुफ की रिहाई कराई। यूसुफ खुशकिस्मत था जो लौट आया। यह कहानी सिर्फ यूसुफ की नहीं यूसुफ जैसे हजारों पाकिस्तानियों की है, जो पाकिस्तान में बेतहाशा बढ़ती जा रही महंगाई और बेरोजगारी से छुटकारा पाने के लिए विदेश में जाने की ख्वाहिश रखते हैं।

यूरोप के मिक्स्ड माइग्रेशन सेंटर के मुताबिक हर साल तकरीबन ४० हजार पाकिस्तानी अवैध ढंग से देश छोड़ते हैं। पिछले साल यूरोप से ऐसे ३४ हजार लोगों को वापस पाकिस्तान भेज दिया गया था। पाकिस्तान में हालात ऐसे हैं कि मानव तस्कर खुलेआम फेसबुक जैसे सोशल मीडिया पर अपना विज्ञापन देते हैं। वह लोगों को काम दिलाने का वादा कर,लालच देते हैं कि अगर वे दो से चार लाख (पाकिस्तानी) रुपए खर्च करें, तो उन्हें समुद्री रास्ते से तुर्किए, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप या उसके आसपास के किसी देश में पहुंचा दिया जाएगा।

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