" /> जीत मिलने तक जारी रहेगी कानूनी जंग!…प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति लें मराठा आरक्षण पर तत्काल निर्णय – मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे

जीत मिलने तक जारी रहेगी कानूनी जंग!…प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति लें मराठा आरक्षण पर तत्काल निर्णय – मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे

मराठा आरक्षण पर आए सुप्रीम कोर्ट के पैâसले पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि इस निर्णय का स्वागत नहीं किया जा सकता। अब प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति मराठा आरक्षण के मसले पर तत्काल पैâसला लें। राज्य की जनता संयम बनाए रखे। मराठा आरक्षण की कानूनी जंग विजय मिलने तक जारी रहेगी।
मुख्यमंत्री के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय की ओर से कहा गया है कि आरक्षण पर निर्णय लेने का अधिकार राज्य को नहीं, बल्कि केंद्र सरकार और राष्ट्रपति को है। यह एक तरह से छत्रपति शिवराय के महाराष्ट्र के लिए मार्गदर्शन ही साबित हुआ है। अब प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से हाथ जोड़कर अनुरोध है कि वे मराठा आरक्षण पर तत्काल निर्णय लें। इससे पहले शाहबानो प्रकरण, एट्रोसिटी कानून के मामले में और धारा ३७० हटाने में केंद्र सरकार ने तत्परता से निर्णय लेकर न्यायप्रियता दिखाई, इसके लिए संविधान में बदलाव किया गया। अब वही गति मराठा आरक्षण के संबंध में भी दिखाई जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्रपति संभाजी राजे पिछले एक साल से मराठा आरक्षण के मामले को लेकर प्रधानमंत्री से मिलने का समय मांग रहे हैं। प्रधानमंत्री ने उनको मिलने का समय क्यों नहीं दिया? सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए पैâसले का स्वागत नहीं किया जा सकता।
राज्य का वातावरण बिगाड़ने की कोशिश कोई न करे
मुख्यमंत्री ने कहा कि इसे लेकर कोई महाराष्ट्र का वातावरण बिगाड़ने की कोशिश न करे। राज्य की जनता किसी के बहकावे में न आए। मराठा आरक्षण को लेकर कानूनी लड़ाई जीत मिलने तक शुरू ही रहेगी! महाराष्ट्र कोरोना के विरुद्ध लड़ाई लड़ रहा है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा मराठा आरक्षण पर लिए गए निर्णय को अस्वीकार करने का पैâसला सुनाया है। यह महाराष्ट्र के किसान, मेहनतकश और लड़ाकू समाज के लिए दुर्भाग्यपूर्ण कहा जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र ने मराठा समाज के स्वाभिमान को संजोए रखने के लिए आरक्षण देने का निर्णय लिया। राज्य विधानमंडल में सभी राजनीतिक पार्टियों द्वारा सर्वसम्मति से यह पैâसला लिया गया था। इस निर्णय को अब सर्वोच्च न्यायालय ने यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया है कि आरक्षण पर निर्णय लेने का अधिकार महाराष्ट्र सरकार को नहीं है। गायकवाड समिति की सिफारिशों पर राज्य सरकार द्वारा लिए गए पैâसले को सर्वोच्च न्यायालय ने नकार दिया है। महाराष्ट्र की विधानसभा सार्वभौम है और सरकार लोगों की आवाज है।