मुख्यपृष्ठसमाचारहोली के लिए सजे बाजार, लोगों पर चढ़ा गुलाल!

होली के लिए सजे बाजार, लोगों पर चढ़ा गुलाल!

दुकानों पर सजी पिचकारी, गुझियों की खुशबू से महकी दुकानें

सामना संवाददाता / लखनऊ। होली का रंग अब बाजार पर चढ़ने लगा है। लखनऊ का सिनेमा रोड, बड़ा चौराहा सहित तमाम बाजारों में इस वक्त होली का रंग दिख रहा है। बाजार गुलजार हो चुके हैं। लोग भारी तादाद में दुकान पर नजर आ रहे हैं। मेहमानों के स्वागत के लिए विभिन्न प्रकार के खाने-पीने की चीजें मिल रही हैं। इसके अलावा त्योहार के लिए रेडीमेड सामग्री उपलब्ध है। वहीं फुटपाथ से लेकर बड़े शोरूम तक बच्चों से लेकर बड़ों तक कपड़े विभिन्न रेंज में उपलब्ध हैं। लोग त्योहार की खरीदारी के लिए घरों से निकल रहे हैं।
होली की मस्ती में जमकर थिरके
पुष्कर में अंतरराष्ट्रीय होली फेस्टिवल में देशी-विदेशी पर्यटक जमकर थिरक रहे हैं। कल रात लोक गीतों पर गैर नृत्य के आयोजन में भी खासा उत्साह देखा गया। फेस्टिवल १७ मार्च तक आयोजित किया जा रहा है। इसमें दुनिया भर के कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीत रहे हैं। दरअसल दो साल कोविड के कारण फेस्टिवल का आयोजन नहीं किया गया था। इस बार हो रहे आयोजन में कला और संस्कृति के रंग रोजाना देखने को मिल रहे हैं।
रंग एकादशी पर झूमी महिलाएं
बुलंदशहर नरौरा नगर व क्षेत्र में रंगभरी एकादशी श्रद्धा भाव से मनाई गई। श्रद्धालुओं ने नरौरा, रामघाट, राजघाट और कर्णवास गंगा तटों पर गंगा स्नान किया और विधि विधान से पूजा अर्चना की। रंगभरी एकादशी को आंवला एकादशी भी कहते हैं शास्त्रों में कथा है कि श्री विष्णु भगवान के श्री मुख से एक प्रकाश पुंज निकल कर पृथ्वी पर गिरा था, जो आंवला वृक्ष बन गया। श्रद्धालु महिलाओं ने आंवला वृक्ष की श्रद्धा भाव से पूजा अर्चना की। व्रत रख श्री विष्णु भगवान को स्मरण किया। आंवला एकादशी की कथा सुनी।
स्थानीय व्यापारियों के खिले चेहरे
स्थानीय युवाओं के साथ पर्यटक भी अपने आपको इसमें शामिल होने से रोक नहीं पा रहे हैं। कल ढोल और चंग की थाप पर स्थानीय युवक व विदेशी पर्यटक जमकर थिरकते नजर आए। वहीं कस्बे के युवाओं ने चंग की धुन पर फाग के पारंपरिक लोक गीत गाए। होली उत्सव के दौरान विदेशी सैलानियों की बीते दिनों की अपेक्षा अधिक संख्या देखी जा रही है। स्थानीय व्यापारियों के चेहरे भी खिल गए हैं। दो साल से मंद पड़े पुष्कर के पर्यटन व्यवसाय के लिए पुष्कर होली फेस्टिवल नई उम्मीद जगा रहा है।

 

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