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राज्य में कर्ज का बढ़ा बोझ! … हर व्यक्ति पर रु. ५६,८७० कर्ज

• अंबादास दानवे ने खोली सरकार की पोल
•  कहा, कर्ज के साथ अपराध में भी महाराष्ट्र आगे
सामना संवाददाता / मुंबई
अंबादास दानवे ने कहा कि सरकार की गलत नीतियों के कारण राज्य पर कर्ज के पहाड़ का बोझ बढ़ता जा रहा है। मौजूदा समय में राज्य पर ७ लाख ७ हजार करोड़ रुपए के कर्ज का पहाड़ है। इस हिसाब से राज्य के प्रत्येक व्यक्ति पर ५६,८७० रुपए का कर्ज है। केंद्र सरकार ने भी महाराष्ट्र के साथ पक्षपात किया है। कर्ज में डूबे महाराष्ट्र को जीडीपी में हिस्सेदारी का आधा फंड ही मिलता है। विधान परिषद में विपक्ष के नेता अंबादास दानवे ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि महाराष्ट्र देश को दिशा देनेवाला राज्य है। लेकिन इस सरकार के कार्यकाल में राज्य अपने रास्ते से भटक गया है। दानवे ने ‘अंतिम सप्ताह प्रस्ताव’ पर बोलते हुए राज्य में कर्ज के बोझ, बिगड़ती कानून व्यवस्था, बेरोजगारी, राज्य की वित्तीय स्थिति, दंगे, समाज में धार्मिक कलह जैसे मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। दानवे ने कहा कि सरकार गतिशील होने का दावा करती है, लेकिन यहां आर्थिक व्यवस्था के साथ-साथ कानून व्यवस्था भी गड़बड़ है।
दानवे ने कहा कि रिकॉर्ड के अनुसार, ठाणे और नागपुर में अपराध में भारी वृद्धि हुई है। गृहमंत्री के जिले नागपुर शहर में अपराध दर में ३३२.९१ प्रतिशत और मुख्यमंत्री के गृह जिले ठाणे में १८४.३३ प्रतिशत की वृद्धि हुई है। मुंबई, ठाणे में सुबह तक डांस बार चल रहे हैं और यह सरकार राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने में पूरी तरह से विफल रही है। राज्य में कानून का कोई डर नहीं है इसलिए दंगे, महिलाओं पर हमले और अत्याचार की घटनाएं बढ़ गई हैं।
केंद्र पर भी पक्षपात का आरोप
प्रशासनिक व्यवस्था में इंजीनियरों पर हाथ उठानेवाले सत्ताधारी विधायकों पर सरकार कार्रवाई नहीं करती, बल्कि विपक्षी दल के विधायकों पर कार्रवाई की जाती है। दानवे ने कहा कि यह सरकार दोहरी भूमिका अपनाती है। पूरी तरह से पक्षपाती सरकार है। इस सरकार के दौरान इतिहास में पहली बार वारकरियों की ऐसी पिटाई की गई जैसी ब्रिटिश काल में भी हिंदुस्थानियों की नहीं हुई थी। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि राज्य में दंगों की घटनाओं के पीछे वास्तव में कौन है?
महाराष्ट्र के साथ केंद्र का अन्याय, यूपी को खैरात
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में राज्य का योगदान १४ प्रतिशत था जबकि राज्य को केवल ७ प्रतिशत धन दिया गया। राज्य को इसकी हिस्सेदारी के अनुसार मदद नहीं मिल रही है। वहीं उत्तर प्रदेश राज्य का जीडीपी में योगदान ७ फीसदी था लेकिन केंद्र की ओर से उसे १८ फीसदी फंड दिया गया। यहां केंद्र सरकार भी पक्षपात कर रही है। महाराष्ट्र राज्य को ६४ हजार करोड़ और उत्तर प्रदेश को १ लाख ८३ हजार ७ करोड़ रुपए मिले। दानवे ने कहा कि १५वें वित्त आयोग में भी गड़बड़ी की गई। केंद्र द्वारा महाराष्ट्र राज्य के साथ गलत व्यवहार किया गया।

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