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ज्ञानवापी में एएसआई सर्वे पर रोक लगाने की मांग को लेकर मुस्लिम पक्ष पहुंचा जिला सत्र न्यायालय

सर्वे को लेकर हो रहे मीडिया कवरेज को भी खड़ा किया कटघरे में, दायर किया याचिका
उमेश गुप्ता / वाराणसी
जिला सत्र न्यायालय में मुस्लिम पक्ष ने पांच तकनीकी बिंदुओं को आधार बनाते हुए दलीलों के साथ एएसआई सर्वे को रोकने का मांग किया है। वहीं ज्ञानवापी में सर्वे के दौरान मीडिया की रिपोर्टिंग पर भी मुस्लिम पक्ष ने सवाल खड़ा करते हुए जिला अदालत में याचिका दाखिल की, जिस पर जिला न्यायाधीश अजय कृष्ण विश्वेश की आदलत में दोनों याचिकाओं पर सुनवाई की गई।
जिला न्यायालय में पहली सुनवाई ज्ञानवापी में मुस्लिम पक्ष के द्वारा एएसआई सर्वे पर रोक लगाने की मांग पर की गई, जिसमें मुस्लिम पक्ष की तरफ से दलील दिया गया कि एएसआई सर्वे नियमों के विरुद्ध किया जा रहा है। मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता के अनुसार एएसआई सर्वे एक वैज्ञानिक सर्वे है, जिसमें सरकार का काफी खर्च होता है। ऐसे में नियम है कि एएसआई सर्वे के खर्च (फीस) वादी पक्ष के द्वारा सर्वे से पहले जमा किया जाए, लेकिन ज्ञानवापी सर्वे से पहले वादी पक्ष के द्वारा कोई शुल्क जमा नहीं किया गया और एएसआई सर्वे भी शुरू कर दिया गया, जो पूरी तरह नियमों के विरुद्ध है। ऐसे ही कई प्वाइंट को इंगित करते हुए मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता ने एआईसी सर्वे को रोकने की मांग किया। जिला न्यायाधीश ने इस प्रकरण पर हिंदू पक्ष से जवाब मांगा है और अगली सुनवाई के लिए १७ अगस्त की तारीख को किया है।
जिला न्यायालय में मीडिया के कवरेज के मामले में भी मुस्लिम पक्ष की अर्जी पर सुनवाई हुई। जिस पर न्यायालय ने निर्देश दिया है कि सर्वे वाले स्पॉट के आस-पास किसी तरह की रिपोर्टिंग नहीं होगी। एएसआई के लोग मीडिया को कोई रिपोर्ट नहीं देंगे। सोशल मीडिया पर भी अनर्गल खबरें नहीं चलनी चाहिए, जिससे शांति भंग की आशंका न हो। बैरिकेडिंग के आगे मीडियाकर्मियों के लिए प्रतिबंध रहेगा। जिला जज डॉ.अजय विश्वेश ने कहा कि एएसआई का सर्वे पूरी तरह सीक्रेट है। सर्वे रिपोर्ट सिर्फ कोर्ट में ही दाखिल हो सकती है। पब्लिक डोमेन में तब तक नहीं लार्ई जाएगी, जब तक कोर्ट के पटल पर एएसआई अपनी रिपोर्ट को दाखिल नहीं करता है।
बता दें कि वाराणसी में देश भर के खबरिया चैनलों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी कई दिनों डेरा डाले हुए हैं। एक दूसरे को पछाड़ने के लिए सर्वे के बाबत बढ़ा-चढ़ाकर खबरें छापी जा रही हैं।

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