मुख्यपृष्ठनए समाचारपृथ्वी के रहस्य से उठेगा पर्दा ...धरातल में छिपे हैं दो पाताल...

पृथ्वी के रहस्य से उठेगा पर्दा …धरातल में छिपे हैं दो पाताल लोक!

वैज्ञानिकों में मच गई है हलचल
सामना संवाददाता / मुंबई
धरातल में एक और पाताल लोक होने का दावा वैज्ञानिकों ने किया है। इस दावे ने दुनिया भर में न केवल हलचल मचा दी है, बल्कि इसे सुनकर लोग भी अचंभित हो उठे हैं। इन सबके बीच कहा जा रहा है कि आनेवाले समय में पृथ्वी के कई रहस्यों से पर्दा उठेगा।
उल्लेखनीय है कि वैज्ञानिकों ने एक नया विचार प्रस्तावित किया, जो दुनिया के दो रहस्यों को एक साथ सुलझा सकता है। हैरान करनेवाली बात यह है कि यह रहस्यमयी जिसे वैज्ञानिक ब्लॉब कह रहे हैं, एक अप्रâीका तो दूसरा दक्षिण-प्रशांत महासागर के नीचे मौजूद है।
१९७० के दशक में भूकंप वैज्ञानिकों ने इसका पता लगाया था। यह ब्लॉब अपने आसपास मौजूद किसी भी वस्तु की तुलना से ज्यादा घने हैं, यानी यह ठोस हैं। रिपोर्ट के अनुसार यह उस समय बने थे जब हमारी धरती का निर्माण हो रहा था। इतिहास में जाकर झांके तो पता चलता है कि यह उस समय की बात है जब प्राचीन धरती की टक्कर मंगल ग्रह के आकार वाले ग्रह थीया से हुई थी। इसी टक्कर के बाद धरती का चंद्रमा बना था। यह शोध चीन, अमेरिका और इंग्लैंड के वैज्ञानिकों ने मिलकर किया है।
२,९०० किमी गहराई में मौजूद है पाताल लोक
वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि हमारे चंद्रमा के अंदर थीया के गुण, रसायन, पत्थर, मिट्टी आदि होगी। लेकिन एक सवाल जो मजबूती के साथ सामने आया कि पृथ्वी के अंदर मौजूद दो पाताल लोकों की संरचना वैâसे हुई? ये दो ब्लॉब मैंटल के नीचे २,९०० किलोमीटर की गहराई में मौजूद हैं। चाइनीज अकेडमी ऑफ साइंसेस की शंघाई एस्ट्रोनॉमिकल ऑब्जरवेटरी के साइंटिस्ट हॉन्गपिंग डेंग ने बताया कि दोनों ब्लॉब धरती के निर्माण के दौरान ही बना था।
विकास की राह पर गई धरती
गौरतलब है कि धरती ४५० करोड़ सालों से लगातार विकास की राह पर है, यह हर दिन शामिल हो रही है। इसका कारण हमारी पृथ्वी के मैंटल का बदलाव है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ब्लॉब ने हमारी धरती के कोर को चारों तरफ से घेर रखा है। प्राचीन टेक्टोनिक स्लैब हो सकते हैं, जो अत्यधिक ऊर्जा से भरे पड़े हैं। हाल ही में नेचर जर्नल में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार धरती के वजन का सिर्फ २-३ फीसदी हिस्सा ही थीया के पदार्थों से बना है। लेकिन दोनों पाताल लोक का घनत्व उसके आसपास मौजूद पदार्थों से २ से ३.५ गुना ज्यादा घना है।

अन्य समाचार