मुख्यपृष्ठविश्वमालदीव की मति मारी, जिसने बचाया देश, उसी को मानता है दुश्मन!

मालदीव की मति मारी, जिसने बचाया देश, उसी को मानता है दुश्मन!

`ऑपरेशन कैक्टस’ के जरिए हिंदुस्थान ने की थी मालदीव की मदद
नवंबर ३, १९८८ को शाम ६:०३ बजे आगरा के एयरफोर्स बेस से एयरफोर्स के दो आइ एल-७६ विमानों ने उड़ान भरी। पहले विमान में ४०० कमांडोज थे। दक्षिण की ओर तिरुवनंतपुरम
क्रॉस करते वक्त दोनों विमान ३७ हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ रहे थे। उन्हें तीन हजार किलोमीटर की दूरी तय कर एक द्वीप में लैंड करना था। समंदर के बीच बसे इस देश का एयरपोर्ट घुप्प अंधेरे में डूबा हुआ था। अब हवाई जहाज २० हजार फीट की ऊंचाई पर था। जहाज के वैâप्टन ने एयरपोर्ट के एटीसी से कोडवर्ड पूछा। जवाब आया, ‘हुडिया हुडिया हुडिया।’ रनवे की बत्तियां जल उठीं सिर्फ १० सेकंड के लिए। वैâप्टन ने समय न गंवाते हुए बड़ी सावधानी के साथ अंधेरे में प्लेन लैंड कर दिया। हिंदुस्थानी सेना के जांबाज पैराट्रूपर्स थे, जिन्हें खतरों से खेलने की आदत थी। इन्होंने एयरपोर्ट और उसके आसपास के इलाके को सुरक्षित तौर पर कब्जे में कर लिया था। उस देश के राष्ट्रपति और उस देश को बचाने की जिम्मेदारी थी हिंदुस्थानी जवानों के कंधों पर। इस बीच हिंदुस्थानी नौसेना के जहाज गोदावरी और बेतवा ने भी अपना कमाल दिखा दिया था। हिंदुस्थानी सेना के इस गुप्त ऑपरेशन को लीड करनेवाले अफसर ने उस द्वीप के राष्ट्रपति से रेडियो पर संपर्क किया, जो एक खुफिया स्थान पर थे। मालदीव में १९८८ में अब्दुल्लाह लुथफी और अहमद सगरू नासिर ने प्लोटे आतंकियों के साथ मिलकर तख्तापलट का षड़यंत्र रचा था। ऐसे संकट के मौके पर हिंदुस्थान सरकार ने उनकी मदद की, हालांकि उनकी गुहार को यूएस, ब्रिटेन, श्रीलंका ,पाकिस्तान आदि देशों ने कोई तवज्जो नहीं दी थी।
तख्तापलट से बचने के लिए जिस द्वीप के राष्ट्रपति ने हिंदुस्थान के प्रधानमंत्री को फोन किया था उनका नाम था मौमून अब्दुल गय्यूम और उस द्वीप का नाम है मालदीव। एशिया का सबसे छोटा देश। मालदीव के राष्ट्रपति गय्यूम ने हिंदुस्थान के तात्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी को फोन कर उनसे मदद मांगी थी। हिंदुस्थानी सेना के इस अभियान का नाम था ‘ऑपरेशन वैâक्टस।’

 

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