मुख्यपृष्ठस्तंभब्रह्मा जी के इकलौते मंदिर ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड

ब्रह्मा जी के इकलौते मंदिर ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड

योगेश कुमार सोनी
\पूरी दुनिया में राजस्थान के पुष्कर नाथ ब्रह्मा जी का शक्तिपीठ के रूप में एक ही मंदिर है। ब्रह्मा जी के विषय में सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि ब्रहमा जी की पूजा घरों में क्यों नहीं की जाती और न ही किसी हवन, यज्ञ इत्यादि में जगत रचयिता ब्रह्मा जी का आवाहन किया जाता! इसके पीछे की एक पौराणिक वत्तांत पंजाब राज्य के कपूरथला जिले के सुल्तानपुर लोधी नामक टाउन में रखे एक अति प्राचीन ग्रंथ श्री भृगु संहिता में दर्ज है। इस ग्रंथ को मुकेश पाठक नाम के बुद्धिजीवी ने पढ़ा था। चूंकि वो इस ग्रंथ को पढ़ने में सक्षम है क्योंकि यह ग्रंथ देवलिपि-भृगुलिपि में लिखा हुआ है। इस ग्रंथ के अनुसार, ब्रह्मा जी का एक ही मंदिर व घरों इत्यादि में पूजा न होने का कारण महार्षि भृगु जी द्वारा ब्रह्मा जी को दिया गया श्राप है, जिसका प्रभाव आज भी देखा जाता हैं। प्राचीन काल में जब सभी संतों व महर्षियों ने सोचा कि आने वाले समय में इस धरती पर रह रही आत्माएं अति दुखी होंगी तो उनके दुख दूर करने के लिए एक हवन की प्रथा आरंभ करनी चाहिए। हालांकि, तब प्रश्न यह उठा कि उस हवन का प्रतिनिधि कौन होगा और किसको यह हवन समर्पित होगा, ताकि हवन करवाने वाले को पुण्यफल की प्राप्ति हो और कल्याण हो सके। तब सभी ने ब्रह्मा जी के पांचवें मानस पुत्र परम तेजस्वी महार्षि भृगु जी को जिम्मेदारी सौंपी कि पता लगाएं, जो त्रिदेवों में से श्रेष्ठ होगा वही इस हवन का अध्यक्ष होगा। सबसे पहले भृगु जी सृष्टि रचयिता ब्रह्मा जी के पास गए तो ब्रह्मा जी ने भृगु जी को देखकर अनदेखा कर दिया, जिसे भुगु जी ने अपना अपमान समझा व ब्रह्मा जी को श्राप दिया कि, `हे ब्रह्मा! जाओ तुम्हारी कलियुग में पूजा नहीं हो।’ यह सुनकर ब्रह्मा जी क्रोधित हुए व कहने लगे कि इस संसार को रचने में मेरा नाम आता है। अगर हमें ही इस सृष्टि से बाहर कर दोगे तो यह सृष्टि शून्य हो जाएगी और अगर हम यह सृष्टि का निर्माण कर सकते हैं तो इसका विनाश भी कर सकते हैं।
तब भृगु जी सोचने लगे कि ब्रहमा जी बात तो ठीक कह रहे हैं और यह भी सोचा कि आने वाली पीढ़ी क्या कहेगी कि मेरी वजह से बनाई गई सृष्टि का विनाश हुआ। इतना बड़ा दोषारोपण मुझ पर लग जाएगा। हालांकि, बाद में भृगु का क्रोध शांत हो गया था लेकिन श्राप दे चुके थे। बहरहाल, आज यह सब ऊपर वाले की लीला है जो एक बार रच दिया वो होना सत्य है। बीते दिनों मंदिर के नाम एक्सक्लूसिव वर्ल्ड रिकॉर्ड जुड़ गया। इसके साथ ही ब्रह्मा जी के मंदिर को अब एक नई पहचान भी मिल गई। धार्मिक और ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर विश्व का प्राचीनतम एवं सर्वाधिक दर्शन किए जाने वाला मंदिर के रूप में अब जाना जाएगा। इस संबंध में बीते वर्ष १६ मई को एक्सक्लूसिव वर्ल्ड रिकॉर्ड संस्था की ओर से मंदिर को एक्सक्लूसिव वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किए जाने की विधिवत घोषणा की गई। कमेटी के सचिव एवं उपखंड अधिकारी सुखाराम पिंडेल को संस्था के प्रतिनिधियों द्वारा जगतपिता ब्रह्मा मंदिर में सर्टिफिकेट भेंट किया गया।

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