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देश की जनता भाजपा को सही समय पर देगी माकूल जवाब! -शरद पवार को विश्वास

सामना संवाददाता / मुंबई
दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से सियासी माहौल गरमाया हुआ है। १३ दिसंबर को दो युवक लोकसभा में घुस गए। इसके बाद विपक्षी दल के सांसदों ने मांग की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह संसद के दोनों सदनों में बयान दें। इन सांसदों के दुर्व्यवहार के आरोप में अब तक दोनों सदनों में विपक्षी दलों के १४३ सांसदों को निलंबित किया जा चुका है। इस तरह के व्यवहार के विरोध में कल दिल्ली में विपक्षी दलों के मोर्चे में हिस्सा लेने के लिए शरद पवार मौजूद थे। इस अवसर पर शरद पवार ने इस मामले में अपनी भूमिका स्पष्ट की।
यह सदन का अधिकार है
लोकसभा में घुसपैठ करनेवाला युवा लोकसभा में कैसे आ गया? किसके पास पर आया? किसने पास दिया? सरकार की ओर से इस पर बयान की जरूरत थी। यह सदन का अधिकार है। विपक्ष ने इस पर सरकार से बयान देने को कहा। लेकिन सरकार ने बयान देने को तैयार नहीं थी। विपक्ष ने निवेदन की जिद की, तो नतीजा सस्पेंड कर दिया गया। आज तक सदन में इस तरह की घटना कभी नहीं घटी थी।
विधानसभा या संसद में काम करते हुए मुझे ५६ साल हो गए हैं। मैं इस तरह से कुछ भी कभी नहीं देखा है। विरोधियों की भी कुछ जिम्मेदारियां होती हैं। विपक्ष को नजरअंदाज कर सरकार अपने तरीके से कार्यभार चलाने की कोशिश कर रही है। लेकिन देश की जनता ये सब देख रही है। मेरा मानना ​​है कि देश की जनता सही समय पर इसकी भारी कीमत वसूल करेगी, ऐसा सूचक बयान इस मौके पर शरद पवार ने दिया।
इतने सांसदों को निलंबन करना योग्य नहीं
विधेयकों पर चर्चा हो, यह उन्हें पसंद नहीं है। अगर कोई विधेयक या कानून सदन के सामने आता है और आप विपक्ष को अपनी बात रखने का मौका दिए बिना उसे पारित कर देते हैं, तो यह ठीक नहीं है। यह संसदीय लोकतंत्र का अपमान है। जो कुछ हुआ वह संसद के इतिहास में आज तक कभी नहीं हुआ था। वह काम इस सरकार ने किया है। मुझे विश्वास है कि देश की जनता उन्हें सही समय पर सबक सिखाएगी, ऐसा भी शरद पवार ने इस मौके पर कहा। १५० सांसदों का निलंबन, यह अच्छी बात नहीं है। सरकार को संवाद कायम रखना चाहिए। लोकतंत्र में, सरकार बातचीत के बिना काम नहीं कर सकती, ऐसा उन्होंने कहा।

कल्याण बैनर्जी की हरकत योग्य या अयोग्य?
इस बीच, तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी ने राज्यसभा के पदेन अध्यक्ष और देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की नकल की, जबकि कुछ सांसद निलंबन के बाद संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। इसके चलते सत्ताधारियों ने आक्रामक रुख अपना लिया है और खुद धनखड़ ने नाराजगी जताते हुए कहा है कि ‘यह जाट समुदाय का अपमान है।’ इस पर शरद पवार ने तीव्र नाराजगी जताई है। अगर कोई सभागृह में नकल करता है तो गलत है, नकल करने वाले सदस्य सभागृह में थे क्या? यह सब सदन से बाहर हुआ। सभागृह के बाहर कोई कुछ करेगा तो उसकी खूब चर्चा हो सकती है। लेकिन इस मामले को यहां तक ​​ले जाना ही अनुचित है। अगर मेरे खिलाफ कुछ होता है तो मेरा यह कहना गलत है कि ‘मैं मराठा हूं, किसान हूं। यह मराठों और किसानों का अपमान है। उपराष्ट्रपति के इस बयान पर शरद पवार ने असहमति जताई।’

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