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आजादी के अमृतकाल का जहरीला सच; उपचार के अभाव मेंं जुड़वां बच्चों की मौत!

 

  • डोली के सहारे अस्पताल पहुंचाई गई पालघर की महिला 
  • राज्य में चरमराई स्वास्थ्य सेवाएं

योगेंद्र सिंह ठाकुर / पालघर
एक तरफ देश आजादी का ‘अमृत महोत्सव’ मना रहा है, दूसरी तरफ जरूरी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में लोगों की जान जा रही है। पालघर के जनजातीय बाहुल्य मोखाडा से एक झकझोर देनेवाली घटना सामने आई है। वहां गर्भवती महिला को समय पर इलाज नहीं मिलने से उसके जुड़वां बच्चों की मौत हो गई और महिला की भी हालत काफी बिगड़ गई। पालघर के ग्रामीण क्षेत्रों में यह पहला वाकया नहीं है। इस तरह की घटनाओं को मीडिया ने कई बार उजागर किया है पर समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। पालघर के पहाड़ी क्षेत्र में स्थित आदिवासियों के आज भी कई गांव सड़क मार्ग से जुड़े हुए नहीं हैं। इसके चलते गर्भवती महिला वंदना बुधर को मौत से लड़ना पड़ा।
मिली खबर के अनुसार मोखाडा तालुका के मर्कटवाड़ी गांव की गर्भवती महिला वंदना बुधर ने दो जुड़वां बच्चों को जन्म दिया। समय से पहले बच्चों के जन्म लेने से महिला और उसके बच्चों की हालत काफी खराब हो गई। दुर्भाग्य से समय पर इलाज न मिलने से दोनों बच्चों की मौत हो गई और वंदना की हालत काफी बिगड़ गई। गर्भवती महिला और उसके बच्चों को अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस सेवा १०८ को फोन किया गया लेकिन गांव को जोड़नेवाली सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी। इसके बाद एक डोली के सहारे वंदना का परिवार खतरनाक रास्तों से करीब तीन किलोमीटर चलकर उसे अस्पताल लेकर पहुंचा लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।
अत्यधिक रक्तस्राव होने के कारण वंदना की हालत काफी बिगड़ गई और समय पर इलाज न मिलने के कारण उसके दोनों जुड़वां बच्चों की मौत हो गई। सड़क न होने के कारण यहां इलाज के लिए महिलाओं, बुजुर्गों को ऐसे ही अस्पताल ले जाया जाता है। मोखाडा तालुका में कई गांव ऐसे हैं जहां सुविधाओं के अभाव में ग्रामीणों को हर दिन परेशानी का सामना करना पड़ता है। आजादी के ७५ साल बाद भी पालघर जिले के कई इलाकों में आदिवासियों को सड़क, बिजली, पानी और स्वास्थ्य जैसी जरूरी सुविधाएं नहीं मिली हैं। आज भी यहां के आदिवासियों को सड़क न होने के कारण अस्पताल तक पैदल जाना पड़ता है। समय पर इलाज नहीं मिलने से लोगों की जान भी चली जाती है। बता दें कि कलेक्टर गोविंद बोडके ने गत २ अगस्त को इस गांव का निरीक्षण किया और इस गांव में तत्काल सड़क स्वीकृत करने का आदेश दिया। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि कुम्भकर्णी  नींद में सोया पीडब्ल्यूडी विभाग जल्द सड़क निर्माण का कार्य शुरू करेगा, इसकी उम्मीद कम ही है।

रिश्तेदारों के घर जाती हैं प्रसव के लिए
यहां के कई आदिवासी क्षेत्रों में गर्भवती महिलाएं प्रसव की तारीख नजदीक आने पर अपने उन रिश्तेदारों के यहां रहने चली जाती हैं, जिनका घर अस्पताल से नजदीक होता है। लेकिन वंदना के लिए यह संभव नहीं हो पाया और उसने अपने बच्चों को खो दिया।

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