मुख्यपृष्ठसंपादकीयद ‘पीओके’ फाइल्स! संकल्प ठीक, लेकिन हिम्मत है क्या?

द ‘पीओके’ फाइल्स! संकल्प ठीक, लेकिन हिम्मत है क्या?

संपादकीय: पाक अधिकृत कश्मीर को ‘आजाद’ करने का संकल्प मोदी सरकार ने लिया है। जिस तरह कश्मीर से धारा-३७० हटाई गई, उसी तरह पाक के कब्जेवाले कश्मीर के भू-भाग को वापस लाने का संकल्प प्रधानमंत्री मोदी का है। ऐसा केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया है। मोदी सरकार के इस भव्य राष्ट्रीय संकल्प से हम सभी आनंद से फूल उठे हैं और उस सुनहरे दिन का इंतजार करते हुए आज से ही बचे हुए दिनों को आगे धकेल रहे हैं। केंद्र सरकार ने यह संकल्प लिया है तो उसका विरोध करने का कोई अर्थ नहीं है। इसके लिए मोदी सरकार को उस भव्य कार्य के लिए जितना हो सके उतना प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। जितेंद्र सिंह ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म देखकर इतने अभिभूत हो गए हैं कि उनमें अब क्या करें और क्या न करें, ऐसा भ्रम निर्माण हो गया है। पाक अधिकृत कश्मीर वापस मिले, यह कौन सच्चा हिंदुस्थानी नागरिक नहीं चाहेगा। श्री मोदी जैसा बुलंद मन और जिद वाला प्रधानमंत्री की गद्दी पर विराजमान है तो पाक अधिकृत कश्मीर को ‘आजाद’ करने का संकल्प निश्चित पूरा होगा। इस बारे में किसी के मन में तिल मात्र भी संदेह होने का कारण नहीं है। पाकिस्तान के कब्जेवाले जम्मू-कश्मीर का क्षेत्र (पीओके) को वापस लेने के लिए १९९४ में संसद में प्रस्ताव मंजूर हुआ था। उसके तहत यह क्षेत्र स्वतंत्र करके फिर से हिंदुस्थान में जोड़ने का हमारा संकल्प है, ऐसा जितेंद्र सिंह ने कहा। धारा-३७० रद्द होगी, ऐसा किसी को लगा था। लेकिन केंद्र सरकार ने तो संकल्प पूरा किया। अब अगला कदम पाक अधिकृत कश्मीर को आजाद करना है, ऐसा हमारे केंद्रीय मंत्री कहते हैं। इसके लिए उनका अभिनंदन करना चाहिए। लेकिन अब सवाल यह है कि पाक के कब्जेवाले कश्मीर को छुड़ाने के लिए मोदी सरकार को कठोर कदम उठाने होंगे। वे पहला कदम कब उठाएंगे? मोदी सरकार इस बारे में कोई प्लान घोषित करे तो अच्छा होगा। पाक अधिकृत कश्मीर को कब्जे में लेने से पहले सरकार को हिंदुस्थानी कश्मीर की कई बातों का स्थायी हल निकालना होगा। हमारे कश्मीर में आज भी अशांति और तनाव है। धारा-३७० हटाई ठीक है लेकिन उसके बाद एक भी नया उद्योग कश्मीर में नहीं आया, निवेश नहीं हुआ और रोजगार के अवसर उपलब्ध नहीं हुए। इस वजह से कश्मीर के युवाओं में असंतोष है। हजारों कश्मीरी पंडितों की ‘घर वापसी’ का संकल्प मोदी ने ७ वर्ष पहले लिया था वो अधूरा है। हमारे पंडितों को अपने ही कश्मीर में अस्थायी नहीं बसाया जा सका तो पाक अधिकृत कश्मीर का नया प्रश्न वैâसे हल करेंगे? ‘उरी : द सर्जिकल स्ट्राइक’, ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म का प्रचार करके वहां के असली मुद्दों का निदान नहीं किया जा सकता। कश्मीरी पंडितों के लिए बनाई गई पुनर्वास व घरकुल योजना भी मोदी सरकार ने पूरी नहीं की है। सात वर्ष में केवल १७ प्रतिशत कश्मीरी पंडितों को घर मिले, जो कि बेहद चौंकानेवाली बात है। पाक आतंकवादियों ने पंडितों की बलि ली लेकिन निर्वासित, बेघर, बेरोजगार पंडितों के लिए राजनीतिक आंसू बहानेवालों ने क्या किया? पंडितों के खून और आंसुओं का राजनीतिक सौदा ही किया। आज भी निर्वासित हजारों पंडित शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं और दिल्ली में भाजपा की सरकार आई फिर भी उनके जीवन में कोई असर नहीं पड़ा है। पंडितों को आसानी से घर दिए जा सकते थे। मोदी सरकार अभी भी कश्मीरी पंडितों को घर नहीं दे सकी है। ऐसे में उनकी सुरक्षित घर वापसी तो दूर की बात है! पाक अधिकृत कश्मीर को लेना यानी मोदी सरकार को पाकिस्तान से सीधा युद्ध करना होगा। सर्जिकल स्ट्राइक के छोटे पटाखे फोड़कर पाक अधिकृत कश्मीर हमारे कब्जे में नहीं आएगा। हम अभी तक पाक जेल में बंद कुलभूषण जाधव को छुड़वा नहीं पाए हैं। दूसरी ओर जब तब उठकर ‘दाऊद-दाऊद’ करना लेकिन उस दाऊद को हम अभी तक अपने कब्जे में नहीं ले सके हैं। लिहाजा, पाक अधिकृत कश्मीर को लेने का संकल्प वैâसे पूरा होगा? अमेरिका ने जब सीधे-सीधे इराक की बागडोर अपने हाथ में ले ली तब हिंदुस्थान ने कोई ठोस भूमिका नहीं ली। इराक का सद्दाम हुसैन खुले तौर पर हिंदुस्थान का मित्र था और कश्मीर के मसले पर वह सभी अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर हिंदुस्थान के पक्ष में खड़ा रहता था। अब रूस-यूक्रेन युद्ध में हम पंडित नेहरू की अलिप्तवादी नीति को स्वीकार करके चुप बैठे हैं। इसलिए पाक अधिकृत कश्मीर को आजाद करने के लिए पाकिस्तान से सीधा युद्ध करने की तैयारी मोदी सरकार की है क्या? पाक अधिकृत कश्मीर को कब्जे में लेकर अखंड हिंदुस्थान का सपना साकार करने का मोदी सरकार का संकल्प अच्छा है। लेकिन वह वैâसे पूरा हो? ‘आजाद कश्मीर फाइल्स’ फिल्म बनाकर और उसका प्रचार करके तथा उस प्रचार पर चुनाव जीतकर पाक अधिकृत कश्मीर को ‘आजाद’ करना संभव नहीं है। कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास का प्रश्न उससे पहले छुड़ाना होगा। हमारे कश्मीर की बेरोजगारी का सवाल स्थायी रूप से खत्म करना होगा। मुख्य बात सेना की तैयारी करना होगा। लद्दाख में घुसे चीनी सैनिकों को हम अभी तक बाहर नहीं निकाल पाए हैं। आतंकवाद जैसा पाकिस्तान का है उससे भी ज्यादा चीन का है। जो लोग इसे भूल गए हैं वे नए संकल्प ले रहे हैं। कश्मीरी पंडितों और कश्मीर की राजनीति को रोककर अगला कदम कब उठाएंगे वह बताएं!

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