मुख्यपृष्ठअपराधगुजरात में पुलिस ही तोड़ रही कानून!

गुजरात में पुलिस ही तोड़ रही कानून!

-२ एसपी, ३ डीएसपी, एक एसआई पर गिरी गाज

-अपहरण और वसूली मामले में दर्ज हुआ केस

सामना संवाददाता / अमदाबाद 

गुजरात में शासन व्यवस्था को लेकर चौंका देने वाली बात सामने आई है। यहां जिनके ऊपर सुरक्षा का जिम्मा है, वही कानून तोड़ रहे हैं। बताया जाता है कि गुजरात के कच्छ जिले में एक फर्म के एक कर्मचारी के अपहरण और जबरन वसूली के मामले में छह वरिष्ठ पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गुजरात हाई कोर्ट के आदेश पर रोक हटाने के लगभग एक महीने बाद अपराध जांच विभाग (सीआईडी) ने दो एसपी, तीन डीएसपी, एक सब-इंस्पेक्टर और इलेक्ट्रोथर्म लिमिटेड के मालिक सहित कुल ११ लोगों पर एफआईआर दर्ज की है।
आरोपियों के खिलाफ नहीं हुई कार्रवाई 
शिकायतकर्ता और उसकी पत्नी छह दिसंबर २०१५ से चार फरवरी २०१६ तक आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने के लिए संबंधित अधिकारियों के पास गए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। हालांकि, कार्रवाई न होने पर उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जिसके बाद १० अक्टूबर २०१९ में हाई कोर्ट ने अधिकारियों को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था, लेकिन आरोपी को सुप्रीम कोर्ट से स्टे मिल गया था। लेकिन इसी साल १६ जनवरी को स्टे हटा लिया गया था।
सीआईडी ने दर्ज किया केस 
इस बारे में सीआईडी ने बताया कि जिन पुलिस अधिकारियों पर केस दर्ज किया गया, उनमें कच्छ के पूर्व एसपी जीवी बारोट और भावना पटेल और डीएसपी आरडी देसाई, डीएस वाघेला और वीजे गढ़वी और सब-इंस्पेक्टर एनके चौहान का नाम शामिल है। इसके अलावा फर्म के दो मालिकों और ११ अन्य लोगों के खिलाफ भी अपहरण और जबरन वसूली की शिकायत दर्ज करवाई गई थी।
क्या था मामला?
शिकायतकर्ता सीरवानी ने अपनी शिकायत में कहा है कि वर्ष २०११ में वह इलेक्ट्रोथर्म लिमिटेड में काम करता था, जहां से बाद में उसने इस्तीफा दे दिया था, लेकिन कंपनी के मालिक बार-बार उसके इस्ताफे को खारिज कर रहे थे। वर्ष २०१५ में सीरवानी का अपहरण करके अमदाबाद में कंपनी के बंगले पर बंधक बनाकर रखा गया था। पीड़ित को नकद, सोन-चांदी और संपत्ति देने के लिए जबरन कोरे कागज पर हस्ताक्षर करवाया गया।

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