मुख्यपृष्ठसमाचारमहाराज कुश की जयंती पर निकली शोभायात्रा

महाराज कुश की जयंती पर निकली शोभायात्रा

  • राष्ट्रभक्ति में लबरेज युवाओं ने मनाया `कुशभवनपुर दिवस’
  • अयोध्या के दशरथगद्दी महंत बृजमोहन दास भी हुए शोभायात्रा में शामिल

विक्रम सिंह / सुलतानपुर

अयोध्या से सटी भगवान श्रीराम के पुत्र कुश की बसाई नगरी सुलतानपुर में शुक्रवार को `कुशभवनपुर दिवस’ व कुश जयंती पारंपरिक उल्लास व उत्साह के साथ मनाई गई। आदिगंगा गोमती के तट पर स्थित रामायण कालीन सीता वुंâड घाट पर कुश प्रतिमा के समक्ष पूजा-अर्चना के बाद विधि-विधान से शुरू हुए कार्यक्रमों का सिलसिला दिनभर चलता रहा। भव्य झांकियों की शोभायात्रा में अयोध्या की ख्यातिप्राप्त दशरथगद्दी के महंत बृजमोहन दास ने भी उपस्थित रहकर श्रद्धालुओं और नगरवासियों का उत्साहवर्धन किया। खास बात यह रही कि संपूर्ण महोत्सव `राष्ट्रप्रेम’ से सराबोर रहा। बड़ी संख्या में शहरवासियों ने तिरंगा लहराकर धर्म-अध्यात्म-संस्कृति के साथ राष्ट्रवाद के अनूठे समन्वय को प्रदर्शित किया।
विगत कई वर्षों से सुलतानपुर शहर की कई सामाजिक संस्थाएं कुश उत्थान सेवा समिति, विश्व हिंदू महासंघ, गोमती मित्र मंडल आदि के साथ प्रत्येक श्रावणी पूर्णिमा को कुश जयंती व कुशभवनपुर दिवस मनाती चली आ रही हैं। मान्यता है कि अयोध्या के राजा भगवान श्रीराम ने सरयू में जलसमाधि लेने के पूर्व अपने संपूर्ण राज्य को भाइयों व पुत्रों में बांट दिया था। इसी क्रम में दक्षिण कोशल (वर्तमान सुल्तानपुर) की सत्ता उन्होंने पुत्र कुश को सौंपी थी। कालांतर में स्वयं कुश ने वर्तमान सुलतानपुर में किले की स्थापना करके इसे अपनी राजधानी बनाया था। गजेटियर व इतिहास की किताबों में आज भी सुलतानपुर का प्राचीन नाम `कुशभवनपुर’ ही मिलता है। इसी कारण यूपी में `योगीराज’ आने के बाद से ही जिले को पुन: पूर्ववर्ती नाम प्रदान करने की मांग उठ रही है।

धर्म-संस्कृति के साथ राष्ट्रवाद का समन्वय
नगर में कुश जयंती पर निकली शोभायात्रा में जहां एक ओर धर्म संस्कृति की झलक दिखी तो वहीं हिंदुस्थानी सेना की कीर्ति का बखान करती झांकियां भी आकर्षण का वेंâद्र रहीं। भगवाध्वज के साथ सड़क पर सैक़ड़ों युवा तिरंगा भी लेकर राष्ट्रवाद के नारे लगाते रहे। इसी के साथ एक बार फिर जिले का नाम कुशभवनपुर करने की मांग पुन: बलवती हो गई है।

 

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