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सरकार व मनपा की लापरवाही का खामियाजा भुगत रही जनता … पिछले साल ६० हजार लोग हुए आवारा कुत्तों का शिकार!

नहीं हो पा रहा है सर्वे 
वैâसे रुकेगी कुत्तों की जनसंख्या
सामना संवाददाता / मंबई
महानगर मुंबई में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। साल २०१४ में मुंबई में लगभग ९५,१२७ आवारा कुत्ते थे, लेकिन अब यह संख्या लगभग दोगुनी होने की आशंका जताई जा रही है। आवारा कुत्तों की वजह से आम जनता को हो रही समस्या को देखते हुए मनपा ने एक साल पहले सर्वेक्षण करने का पैâसला किया था। लेकिन इस घाती सरकार की अनदेखी के चलते अब तक आवारा कुत्तों के सर्वेक्षण का काम शुरू नहीं हो सका है। सरकार और मनपा प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। पिछले एक साल में मंबई में आवारा कुत्तों द्वारा नागरिकों को काटने के मामले में वृद्धि हुई है। ६० हजार से अधिक लोगों को इन आवारा कुत्तों का शिकार होना पड़ा है।
जनवरी महीने के अंतिम सप्ताह से सर्वेक्षण शुरू
मनपा का दावा है कि जनवरी महीने के अंतिम सप्ताह से सर्वेक्षण शुरू होगा, जिसमें आवारा कुत्तों और घरेलू जानवरों की जनगणना की जाएगी। मनपा पहली बार पालतू कुत्तों की संख्या और उनकी नस्लों की गिनती भी करेगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि लोगों के पास किस तरह के कुत्ते हैं। मनपा के इस सर्वे से पता चलेगा कि मुंबई में इस समय कितने पालतू जानवर और आवारा कुत्ते हैं। साथ ही २०१४ के आंकड़ों से तुलना भी की जाएगी। परिणामस्वरूप, उन स्थानों पर जहां आवारा कुत्तों की संख्या में वृद्धि हुई है, पशु कल्याण एजेंसियां जन्म नियंत्रण अभियानों की योजना बनाने में सहायता करेंगी और सभी आवश्यक उपाय लागू करेंगी।
लगातार बढ़ रहे डॉग बाइट के मामले
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्ष २०१८ से आवारा कुत्तों की नसबंदी के अभियान के तहत जानवरों की एक संस्था ने लगभग ९५,००० आवारा कुत्तों की नसबंदी की थी। सूत्रों की मानें तो उस समय २५,९३५ आवारा कुत्तों की नसबंदी नहीं की गई थी, जिनमें से ११,२६१ कुत्ते मादा थे और १४,६७४ कुत्ते नर। साल २०२३ में राज्य में कुत्तों के काटने के ४,३५,१३६ मामले दर्ज किए गए थे, जबकि २०२२ में ३,९०,८६८ मामले सामने आए थे। यानी कुत्ते के काटने के मामलों में ११.३२ फीसदी की वृद्धि हुई है।

कुत्तों की देखभाल में उठाए जाएं आवश्यक कदम
देवनार बूचड़खाने के महाप्रबंधक डॉ. कलीम पाशा पठान ने कहा कि इस सर्वेक्षण के निष्कर्षों से कुत्तों की देखभाल में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे। इसके अतिरिक्त, पालतू कुत्तों के सर्वेक्षण से पता चलेगा कि लोग अपने घरों में किस प्रकार के पालतू जानवर रखते हैं।

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