मुख्यपृष्ठखेलदुखी है रानी, संन्यास नहीं, बल्कि वो मैदान पर खेलना चाहती हैं।

दुखी है रानी, संन्यास नहीं, बल्कि वो मैदान पर खेलना चाहती हैं।

यह हिंदुस्थानी महिला हॉकी की बात है, जिसकी रानी दुखी है। दुख का कारण यह है कि उन्हें लगातार दो सालों से अनदेखा किया जा रहा है। जी हां, ये हैं रानी रामपाल। कभी टीम इंडिया की कप्तान रहीं और ओलिंपिक में अपनी टीम का नेतृत्व किया, आज टीम से बाहर हैं। अपने बाहर होने के कारण के रूप में वो कोच यानिक शापमैन का नाम लेती हैं। अब चूंकि वो टीम से बाहर हैं तो हॉकी जगत में चर्चा फैल गई कि वो संन्यास ले रही हैं। इन चर्चाओं को विराम देते हुए रानी ने कहा कि उनका ऐसा कोई इरादा नहीं है। संन्यास नहीं, बल्कि वो मैदान पर खेलना चाहती हैं। रानी को उम्मीद है कि एक बार फिर वो टीम में लौटेंगी। पिछले ओलिंपिक में रानी की अगुवाई में ही टीम चौथे स्थान पर रही थी। उसके बाद से रानी टीम से बाहर चल रही हैं। वो जिस कोच का नाम लेती हैं। उसने रानी के बाहर रहने पर कोई बयान नहीं दिया है। फिलहाल, रानी को जूनियर हाकी टीम का कोच बनाया गया है। वो अभ्यास में भी जुटी हुई हैं और संन्यास के बारे में नहीं सोच रही हैं। वो अभी खेलना चाहती हैं। अभी उनमें हॉकी बहुत बची है।

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