मुख्यपृष्ठसमाचारकनपुरियों की धूम जारी `रंगबाजी' भारी!... कानपुर के गंगा-मेला पर चढ़ा रंग

कनपुरियों की धूम जारी `रंगबाजी’ भारी!… कानपुर के गंगा-मेला पर चढ़ा रंग

सामना संवाददाता / कानपुर। यूपी में कानपुर एक ऐसा शहर है, जहां सात दिनों तक होली मनाई जाती है। आखिरी दिन गंगा मेला होता है, जिस दिन होली से ज्यादा रंग कानपुर में खेला जाता है। कल सुबह से ही होली खेलने के लिए लोगों की भीड़ सड़कों पर उतर आई। ढोल-बाजे के साथ सड़कों पर लोग रंग लगाते नाचते-गाते निकले। इसके अलावा गाने बजाते हजारों की संख्या में हुरियारे रंगों का ठेला लेकर निकले। पहली बार रंगों के ठेले के साथ लोगों का हुजूम उमड़ा।
सुबह से जुटने लगी थी भीड़
बता दें कि कल सुबह रंगों का ठेला निकला। बुधवार सुबह से ही हटिया में हजारों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। सुबह ११ बजे रंगों का ठेला हटिया से होते हुए मेन रोड पर पहुंचा। इसके साथ ही हर मोहल्ले से गुजरते हुए लोगों का हुजूम इसमें जुड़ता गया। हटिया के रज्जन बाबू पार्क से गंगा मेला स्थान तक ऐतिहासिक रंग का ठेला मार्ग पूरी तरह भरा रहा।
सरसैया घाट पर होली मिलन समारोह
सरसैया घाट पर शाम को भव्य होली मिलन समारोह हुआ। यहां पर जिला प्रशासन ही नहीं, सभी प्रमुख राजनैतिक पार्टियों के भी स्टॉल लगाए गए थे। इसके साथ ही शहर के प्रमुख समाज सेवी संस्थाओं समेत सैकड़ों स्टॉल लगे रहे। शाम को शहर के राजनेताओं और प्रमुख लोगों के साथ ही सरसैया घाट पर हजारों की भीड़ जुटी। सभी एक-दूसरे को बधाई देने के साथ ही गुलाल लगाकर फूलों की होली खेली।
अंग्रेजों के जमाने से चल रही है प्रथा
जानकारी के अनुसार यह प्रथा आज की नहीं, देश की आजादी से पहले १९४२ से अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही है। आजादी से पहले हटिया कानपुर का हार्ट हुआ करता था। यहां पर लोहा, कपड़ा और गल्ले का व्यापार होता था। व्यापारियों के यहां आजादी के दीवाने और क्रांतिकारी डेरा जमाते और आंदोलन की रणनीति बनाते थे। एक बार होली के दिन अंग्रेज अधिकारी घोड़े पर सवार होकर आए और होली बंद करने को कहा तो गुलाब चंद सेठ ने साफ मना कर दिया था। अंग्रेज अधिकारियों ने हुकूमत के खिलाफ साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार करने के बाद सरसैया घाट स्थित जेल में बंद कर दिया था।

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