मुख्यपृष्ठनए समाचार‘विपक्ष की भूमिका सत्ताधारी के समकक्ष’

‘विपक्ष की भूमिका सत्ताधारी के समकक्ष’

सामना संवाददाता / नागपुर

लोकतंत्र की खूबसूरती को बरकरार रखने की जरूरत, विजय वडेट्टीवार ने की विपक्ष की व्याख्या

जाति, धर्म, पंथ, क्षेत्र, भाषा, लिंग और रंग का भेद किए बिना एक संप्रभु, धर्मनिरपेक्ष भारत के निर्माण के लिए युवाओं से पहल करनी चाहिए। इसके लिए अपने आपको पूरी तरह समर्पित कर काम करना चाहिए, ऐसा आह्वान करते हुए स्वतंत्रता को गुलाम बनाने के लिए दिन ब दिन अनेक ताकत, लोग नए नए षड्यंत्र रचते रहते हैं। ऐसे षड्यंत्र को तोड़- मरोड़कर स्वतंत्रता की रक्षा करना सभी का कर्तव्य है, ऐसा विधानसभा में विधानसभा नेता प्रतिपक्ष विजय वडेट्टीवार ने कल कहा।
वे राष्ट्रमंडल संसदीय अध्ययन कक्षा में ‘संसदीय लोकतंत्र में सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों की स्थिति, कर्तव्य और भूमिका और विधायिका में भूमिका’ विषय पर भाग लेनेवाले छात्रों का मार्गदर्शन करते हुए बोल रहे थे। इस अवसर पर विधायक प्रवीण दरेकर, विधानमंडल सचिव विलास आठवले भी उपस्थित थे।
वडेट्टीवार ने कहा, ‘हमारे विपक्ष का काम सत्ता में उन लोगों को पकड़कर लोगों की समस्याओं को हल करने के लिए सरकार को मजबूर करना है, जो संविधान को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।’ डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने कहा था, जब कोई विपक्षी दल नहीं होता, तो लोगों के बुनियादी अधिकार खतरे में पड़ जाते हैं। क्योंकि इन अधिकारों के उल्लंघन के लिए कोई भी सत्तारूढ़ दल को जवाबदेह नहीं ठहरा सकता। जिन देशों में संसदीय लोकतंत्र प्रचलित है, वहां विपक्षी दल सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त राजनीतिक निकाय है। संविधान बहुत बड़ी ताकत है। संविधान ने देश के प्रत्येक नागरिक को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास और पूजा की स्वतंत्रता दी है। अपने लोकतंत्र बचाने के लिए धर्मनिरपेक्ष भारत बनाने के लिए युवाओं का योगदान बेहद महत्त्वपूर्ण है, ऐसा भी वडेट्टीवार ने कहा।

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