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छत के नीचे छतरी लगाकर पढ़ाई! …सिवनी में सरकारी स्कूल की छत जर्जर

सामना संवाददाता / सिवनी
मध्य प्रदेश के सिवनी में एक सरकारी स्कूल के बच्चे टपकती छत के नीचे छाता लेकर पढ़ाई कर रहे हैं। छत से बारिश का पानी टपकता है। आदिवासी बाहुल्य घंसौर ब्लॉक के खैरीकला गांव के प्राइमरी स्कूल के ये हालात तब हैं, जब मध्य प्रदेश सरकार अपने स्कूलों को प्राइवेट स्कूल जैसा बनाने के लिए स्कूल खोल रही है। लोगों का कहना है कि स्कूल की हालत इतनी खराब है कि एक बार तो छत से प्लास्टर का टुकड़ा बच्चे के सिर पर गिर गया था। गनीमत रही कि किसी बच्चे को चोट नहीं आई। इसकी शिकायत भी की गई लेकिन सुनवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि बच्चों को स्कूल भेजने में भी डर लगता है।

प्रस्ताव स्वीकृत का बनाया बहाना
शाला प्रबंधन समिति का कहना है कि स्कूल की खराब हालत से अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। कई बार मरम्मत के लिए आवेदन दे चुके हैं। घंसौर के बीआरसीसी देवीलाल सेन का कहना है कि स्कूल की मरम्मत के लिए प्रस्ताव जिला शिक्षा केंद्र को भेज चुके हैं। जैसे ही स्वीकृत होकर रकम आएगी, मरम्मत करवा दी जाएगी।

नदी पार कर आने को मजबूर हैं बच्चे
हरदा के रहटगांव तहसील के वनग्रामों के बच्चे उफनती नदी को पार कर स्कूल जा रहे हैं। रोजाना करीब २०० स्कूली बच्चे जान जोखिम में डालकर गंजाल नदी को पार करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव से बाहर जाने के लिए ये एकमात्र रास्ता है। छोटे बच्चों को उनके परिजन कंधों पर ले जाते हैं।

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