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एक महीने में गिरने लगा बिल्डिंग का स्लैब! …बिल्डरों को नहीं है गरीबों के जान की परवाह

• पीआईएल एक्टिविस्ट ने खोला राज
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई में ऐसे कई पुनर्विकास प्रोजेक्ट है, जो आज भी संदेह से भरे हुए हैं। ऐसा ही एक एसआरए का रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट घाटकोपर स्थित एलबीएस मार्ग पर है, जो बीते कई सालों से धीमी गति से चल रहा है और बिल्डर ने इसे बनाने में कई नियमों का उल्लंघन भी किया। इसी संदर्भ में पीआईएल एक्टिविस्ट नितिन दोशी ने मुंबई हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका के अनुसार, बिल्डिंग बनाते समय ट्री अथॉरिटी से अनुमति नहीं ली गई थी, सीएफओ की अनुमति नहीं ली गई थी, टीडीआर फ्राॅड किया गया और बिल्डिंग बनाते समय कई नियमों का उल्लंघन भी किया गया। यह बिल्डिंग अंबाजी कंस्ट्रक्शन द्वारा बनाई गई है। लेकिन बिल्डिंग की हालत एक महीने में ही खराब होती दिखाई दे रही है। बिल्डिंग बनाते समय खराब सामग्री के इस्तेमाल के कारण फ्लैट का स्लैब गिरने लगा। बारिश के समय पानी टपकने के कारण लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। हालांकि, डेवलपर का कहना है कि इमारत खराब होने के बाद उन्होंने मरम्मत कराई थी। बिल्डर को ५ बिल्डिंग बनानी थी, जिसमें से अब तक सिर्फ २ बनकर तैयार है।
ट्री अथॉरिटी से नहीं
ली गई थी अनुमति
२ पुनर्विकास बिल्डिंगों के निर्माण के लिए गैर कानूनी तरीके से पेड़ों को हटाया गया था, जबकि पेड़ों को हटाने से पहले अथॉरिटी से बाकायदा अनुमति ली जाती है, जिसे बिल्डर ने नहीं लिया था। पीआईएल एक्टिविस्ट नितिन दोशी ने आरोप लगाया है कि बिना नियम के ऐसे पेड़ काटना सरासर पर्यावरण कानून के खिलाफ है।
सीएफओ की अनुमति नहीं है शामिल
किसी भी गृह निर्माण कार्य के पास फायर ब्रिगेड की गाडियों के जानें के लिए उचित रास्ता छोड़ा जाता है। याचिका एक्टिविस्ट नितिन दोशी के आरोपों के अनुसार, एसआरए ने बिना जांच-पड़ताल के बिल्डर को फ्लैट में पजीशन की अनुमति दे दी है। नियमों के अनुसार आर्किटेक्ट द्वारा बनाए गए प्लान में चीफ फायर ऑफिसर की अनुमति की जरूरत होती है। यह अनुमति बिल्डर को नहीं मिली लेकिन फिर भी एसआरए ने जांच-पड़ताल किए बिना बिल्डर को ओसी दे दी। वही अंबाजी कंस्ट्रक्शन के केरशी रंदेरिया ने कहा कि याचिकाकर्ता के आरोप के बारे में हम कोर्ट में जवाब देंगे और कोर्ट का जो आदेश होगा उसका पालन करेंगे। हमें किसी बाहरी लोगों के आरोप से कोई मतलब नहीं है।

बिना किसी उचित और खराब गुणवत्ता की बिल्डिंगों के निर्माण के कारण आम जनमानस की जान को खतरा बन सकता है। इस बिल्डिंग में दमकल की गाड़ियों को जाने के लिए उचित जगह भी नही है। आने वाले समय में वहां रहनेवाले लोगों के लिए यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। मेरी यह मांग है कि एसआरए ऐसी बिल्डिंगों की सही तरीके से जांच पड़ताल करें और फिर ही उन्हें ओसी दें। यदि उन्हें ऐसी कोई भी समस्या दिखाई देती है तो उसे गिराने का आदेश दे और पुन: निर्माण करने की बात रखें। -पीआईएल एक्टिविस्ट नितिन दोशी

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