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मंडप में सिंहासन , घरों में ‘मिट्टी’! इस साल बाप्पा का ट्रेंड कुछ बदला-बदला सा

  • पर्यावरण के अनुकूल उत्सव पर जोर
  • बाल गणेश मूर्तियों की भी अच्छी मांग

सामना संवाददाता / मुंबई
कोरोना महामारी के नियंत्रण में आते ही करीब दो सालों से सभी उत्सवों पर लगा ग्रहण अब दूर हो गया है। इसके तहत हाल ही में धूमधाम से दही-हंडी उत्सव मनाने के बाद भक्त अब बाप्पा के स्वागत में जुट गए हैं। इस बार भक्तों के बीच सिंहासन पर आरूढ़ बाप्पा को अधिक पसंद किया जा रहा है, जबकि घरों में स्थापित करने के लिए ‘मिट्टी’ से बनी गणेश प्रतिमाओं की मांग ज्यादा हो रही है और पीओपी की मूर्तियों की मांग कम है। इस तरह इस बार गणेशोत्सव में बाप्पा का ट्रेंड कुछ बदला-बदला सा है।
उल्लेखनीय है कोरोना के प्रकोप के कारण पिछले दो वर्षों में बड़े पैमाने पर सार्वजनिक गणेशोत्सव नहीं मनाए गए। हालांकि इस साल तमाम नियमों और पाबंदियों में ढील दिए जाने के बाद एक बार फिर से सभी त्योहार मनाए जा रहे हैं इसलिए गणेश भक्तों में भारी उत्साह है। इसके साथ ही कोरोना के पहले जिन गणेश मूर्तियों की मांग थी, वह इस साल भी जारी है। वहीं घर में मिट्टी से बनी गणेश मूर्तियों को लेकर भक्तों का काफी अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। नागरिक पर्यावरण के अनुकूल त्योहार मनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
इस साल घरेलू गणपति के लिए बाल गणेश की मूर्तियों की मांग बढ़ गई है। दूसरी तरफ दो सालों से सार्वजनिक मंडलों में चिंतामणि के विराजमान न होने से इस रूप की मांग भी अधिक है। लालबाग के राजा का रूप सभी को पसंद आता है इसलिए हर साल इनकी मांग लगातार बनी रहती है। ऐसे में राज्य के बाहर भी लालबाग के राजा का क्रेज कायम है। रत्नागिरी के साथ ही सूरत, दिल्ली जैसे शहरों में लागबाग के राजा के रूप की मांग हो रही है। दूसरी तरफ इस वर्ष मूर्तिकार इस बात पर खेद जता रहे हैं कि देरी से प्रतिबंधों में ढील दिए जाने की वजह से उन्हें समय नहीं मिला। इसके साथ ही कारीगरों और समय की कमी के कारण कई मंडलों की मांगों को वे पूरा नहीं कर सके।

२,००० गणेश मंडलों को अनुमति
मुंबई में गणेश उत्सव के लिए आवेदन करने के अंतिम दिन मनपा के पास ३,२५५ मंडलों ने आवेदन किया था। इसमें से अब तक १,९४७ मंडलों को अनुमति दे दी गई है, जबकि शेष २,७३२ मंडलों के आवेदन प्रक्रिया में हैं। इन आवेदनों को आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए जाने के बाद अगस्त तक अनुमति दे दी जाएगी। यह जानकारी उपायुक्त काले ने दी।
मनपा की दिखानी पड़ेगी अनुमति
मुंबई में करीब १२,००० सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल हैं। इसमें से करीब साढ़े तीन हजार मंडल सड़क से सटकर मंडप तैयार करते हैं। इन मंडलों को मनपा से अनुमति लेना अनिवार्य है। इस पृष्ठभूमि पर उत्सव के दौरान अधिकारियों के दौरों में मंडलों को मनपा से प्राप्त अनुमति दिखानी पड़ेगी। अनुमति न दिखाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सज गए हैं बाजार
गणेशोत्सव की चंद दिनों में शुरुआत हो जाएगी। इससे पहले अभी से ही बाजार सज गए हैं। गणेश के आगमन पर भक्तों में अपार हर्ष और उल्लास है। दो साल बाद श्रद्धालुओं के उत्साह की गाड़ी एक बार फिर पटरी पर आ रही है।

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