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माता-पिता के जीवित रहते बेटा संपत्ति का हकदार नहीं!

•  मुंबई हाइकोर्ट का अहम  फैसला
•  बेटे की याचिका हुई खारिज
सामना संवाददाता / मुंबई । बीमार पति के इलाज के लिए पत्नी को संपत्ति बेचने का अधिकार है। माता-पिता के जीवित रहते बेटे का उक्त संपति पर कोई अधिकार नहीं है। मुंबई हाईकोर्ट ने पारिवारिक संपत्ति को लेकर दाखिल की गई याचिका पर अहम फैसला सुनाया है। दरअसल, याचिकाकर्ता के पिता वर्ष २०११ से अस्पताल में भर्ती हैं, उनके इलाज का पूरा खर्च उनकी पत्नी उठाती है। बेहतर इलाज के लिए पैसे कम पड़ने लग गए, जिसकी वजह से पत्नी ने फ्लैट बेचने का निर्णय लिया परंतु बेटे ने घर बेचने के खिलाफ मुंबई हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी।
न्यायमूर्ति गौतम पटेल और न्यायमूर्ति माधव जामदार की खंडपीठ ने उस याचिका पर सुनवाई कर अपने आदेश में कहा कि तुम्हारे पिता जीवित हैं। तुम्हारी माता भी जिंदा है, ऐसे में आपको पिता की संपत्ति में कोई दिलचस्पी नहीं होनी चाहिए। आपकी माता इसे बेच सकती हैं। उन्हें आपकी अनुमति की आवश्यकता नहीं है। खंडपीठ ने अपने १६ मार्च के आदेश में उल्लेख किया कि याचिकाकर्ताओं ने बड़ी संख्या में दस्तावेजों को संलग्न किया है, जिसमें माता द्वारा इलाज के भुगतान किए गए खर्च और बिलों को दर्शाया गया है परंतु बेटे द्वारा एक भी कागज का उल्लेख नहीं किया गया है। कोर्ट ने कहा कि किसी भी समुदाय या धर्म के लिए उत्तराधिकार कानून की किसी भी अवधारणा में बेटे को फ्लैटों में कोई अधिकार नहीं होता है।
बता दें कि पिछले साल अक्टूबर में मुंबई के जेजे अस्पताल ने हाईकोर्ट को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें कहा था कि पिता को साल २०११ से डिमेंशिया है। उन्हें न्यूमोनाइटिस और बेड सोर हैं। उन्हें नाक से ऑक्सीजन दी जाती है। इसके साथ ही ट्यूब के जरिए खाना खिलाया जाता है। उनकी आंखें किसी आम इंसान की तरह घूमती हैं लेकिन वो देख नहीं सकते। लिहाजा वो कोई निर्णय नहीं ले सकते हैं, वो पूरी तरह कोमा में हैं, ऐसे हालात में हाईकोर्ट ने पिछले साल उनकी मां को परिवार चलाने के लिए कानूनी अधिकार दिए थे, यानी वो चाहे तो अपने पति के इलाज के लिए कोई भी प्रॉपर्टी बेच सकती हैं। खंडपीठ ने बेटे की याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि संपति बेचने के पैâसले पर उसकी सहमति की आवश्यकता नहीं है।

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