मुख्यपृष्ठअपराध२५ करोड़ की लालच में बेटे ने बाप को मार डाला!

२५ करोड़ की लालच में बेटे ने बाप को मार डाला!

कमलकांत उपमन्यु/ मथुरा। थाना सदर बाजार क्षेत्र स्थित अशोक बिहार में छत पर सो रहे बुजुर्ग की निर्मम हत्या का पुलिस ने खुलासा करते हुए बुजुर्ग के पुत्र को गिरफ्तार कर लिया है। डूब क्षेत्र के मुआवजे में मिल रहे २५ करोड़ रुपए की लालच में कलियुगी बेटे ने ही अपने पिता की निर्मम हत्या की थी। पुलिस ने आरोपी पुत्र को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
एसपी सिटी ने बताया कि २४/२५ अप्रैल की रात्रि में ८० वर्षीय हुकुमचंद सैनी निवासी अशोक विहार कॉलोनी थाना सदर बाजार की अज्ञात लोगों ने सिर कुचलकर हत्या कर दी थी। घटना के अनावरण को लगी टीमों ने परिवार की पारिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी की तो ज्ञात हुआ कि मृतक हुकुमचंद सैनी को वर्ष २०१५ में डूब क्षेत्र में खेती आने के कारण मुआवजे के रूप में लगभग तीन करोड़ रुपया मिला था। उक्त रुपयों को हुकुमचंद सैनी द्वारा अपने बेटों में न बांटकर अपने छोटे भाई गुलाबचंद सैनी के साथ कोल्ड स्टोरेज की पार्टनरशिप में लगा दिया था। गुलाबचंद सैनी मृतक के पुत्रोें के साथ उनकी हिस्सेदारी व हिसाब किताब को नहीं बताते थे। अभी यह भी जानकारी में आया कि हुकुमचंद को पुन: डूब क्षेत्र की जमीन में मुआवजे के रुपये में लगभग २५ करोड़ रुपये मिलने वाले हैं। पुलिस को इतनी जानकारी मिलते ही हत्या में किसी नजदीकी परिवारीजन का हाथ होने का अंदेशा हुआ। पुलिस टीम ने बुधवार को मृतक के पुत्र विनोद सैनी पुत्र स्व.श्री हुकुमचंद सैनी को गिरफ्तार कर जब कड़ाई से पूछताछ की तो
विनोद ने पिता की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया। अभियुक्त विनोद ने पूछताछ में बताया कि मेरे पिता हुकुमचंद सैनी को वर्ष २०१५ में करीब ०३ करोड़ रुपया मुआवजे के रूप में मिला था जिसमें करीब २.५ करोड़ रुपया उन्होंने हमारे चाचा गुलाब चन्द सैनी के साथ कोल्ड स्टोर में लगा दिया था। उक्त रुपयों में से बड़े भाई अनिल सैनी को लगभग १० लाख रुपये तथा हम भाईयों को दो-दो तीन-तीन लाख रुपये दिये थे। उक्त रुपयों में से मैंने सोने चांदी के व्यापार की दुकान खोली थी जो नहीं चली। मेरी बेटी मुझसे पढ़ाई के लिए कई बार पैसे मांगे थे जो मैं दे नहीं पा रहा था तथा मेरी पुत्रियां शादी लायक हो गई हैं इस कारण से मैंने पिताजी से पैसा मांगा था। वह नहीं दे रहे थे, बार-बार टालमटोल कर रहे थे। जिसकी वजह से मैं बड़े तनाव में था। हमारे ही रुपयों से दूसरे लोग मजे ले रहे थे और हम पांचों भाई भुखमरी की कगार पर थे। अभी बहुत जल्द ही मेरे पिताजी को पुन: डूब क्षेत्र के मुआवजे की लगभग २५ करोड़ रुपये की धनराशि आने वाली थी। मेरे मन में यह बात घर कर गयी कि कहीं ये फिर एक बार उन रुपयों को न लुटा दें। मेरे पिता की मृत्यु के बाद यह रुपया हम भाइयों में बंटेगा। यही सोचकर मैंने अपने पिता की हत्या कर दी।

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