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दिल्ली से मिले ड्राफ्ट को अध्यक्ष ने पढ़कर दिखाया! … विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर संजय राऊत का हमला

सामना संवाददाता / मुंबई
विधानसभा अध्यक्ष और विधायक अयोग्यता ट्रिब्यूनल के प्रमुख राहुल नार्वेकर द्वारा आज सुनाया गया फैसला वास्तविक फैसला नहीं है। इस फैसले का ड्राफ्ट दिल्ली में तैयार किया गया था। इन शब्दों में शिवसेना नेता व सांसद संजय राऊत ने जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि दिल्ली से दिए गए ड्राफ्ट को अध्यक्ष ने पढ़ा है। शिवसेना ने ‘शिंदे’ गुट के १६ विधायकों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अयोग्यता याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई के लिए विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर को मध्यस्थ नियुक्त करने का आदेश दिया था। इसके बाद राहुल नार्वेकर ने कल शाम पैâसला सुनाया।

यह फैसला नहीं, बल्कि एक साजिश है
आज का फैसला फैसला नहीं, बल्कि एक साजिश है। राज्य की जनता जानती है कि असली शिवसेना कौन है।

आम लोगों के खून में है शिवसेना
ये भाजपा की साजिश थी कि एक दिन वे बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना को खत्म कर देंगे। लेकिन शिवसेना ऐसे खत्म नहीं होगी, शिवसेना आम लोगों के बीच है, शिवसेना हमारे खून में है।

सुप्रीम कोर्ट समझदार है, हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे
विधानसभा अध्यक्ष को लगता है कि वे ही होशियार हैं। अध्यक्ष द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट समझदार है। अब सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि क्या करना है। शिवसेना की अदालती लड़ाई जारी रहेगी।

ये है मैच फिक्सिंग
विधानसभा अध्यक्ष द्वारा दिया गया यह नतीजा मैच फिक्सिंग है। यह और कुछ नहीं है। भाजपा ने बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना को वनवास भेजने का काम किया है। विधानसभा अध्यक्ष को निर्णय लेने का क्या अधिकार है? संजय राऊत ने पूछा कि क्या भाजपा द्वारा नियुक्त नार्वेकर ६० साल पहले बालासाहेब ठाकरे द्वारा स्थापित शिवसेना के स्वामित्व का फैसला करेंगे?

महाराष्ट्र की पीठ में खंजर घोंपा
बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना चोरों को सौंपने का अधिकार आपको किसने दिया? यह अब जनता तय करेगी। लोग उन्हें नहीं छोड़ेंगे। बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना की ऐसी हालत हो गई है कि यह महाराष्ट्र की पीठ में खंजर घोंपने का भयानक रूप है। राज्य की ११ करोड़ जनता उन्हें नहीं छोड़ेगी। शिवसेना फिर खड़ी होगी।

गुजराती लॉबी का पाप
भरत गोगावले एक अवैध व्हिप है। राज्यपाल का कदम अवैध है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राज्यपाल को बहुमत तय करने का अधिकार नहीं है। राहुल नार्वेकर गुजराती लॉबी का सपना पूरा करने के लिए बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना को खत्म करने का काम कर रहे हैं। उन्होंने महाराष्ट्र के गद्दारों से हाथ मिला लिया है। ये गुजरात लॉबी का पाप है। दिल्ली में दो लोग इस काम को शिद्दत से कर रहे हैं।

यह मराठी मानुष के लिए काला दिन
अवैध रूप से विधानसभा अध्यक्ष द्वारा दिया गया यह अवैध निर्णय है। आप कितनी भी कोशिश कर लें, शिवसेना खत्म नहीं होगी। गुजरात लॉबी कितनी भी कोशिश कर ले, शिवसेना खत्म नहीं होगी। विधायक और सांसद शिवसेना नहीं हैं, एकनाथ शिंदे ने शिवसेना को खत्म करने की जो कोशिश की, जो पाप किए, उन्हें इतिहास कभी माफ नहीं करेगा। संजय राऊत ने गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि यह मराठी लोगों के लिए काला दिन है। शिवसेना को खत्म का मतलब महाराष्ट्र को खत्म करना है। ये काम किया है एक मराठी शख्स यानी राहुल नार्वेकर ने। यह निर्णय भी उसी प्रकार अवैध है, जिस प्रकार यह अध्यक्ष अवैध है।
राष्ट्रीय कार्यकारिणी देती है पक्षप्रमुख को अधिकार
राहुल नार्वेकर ने २०१८ में बने शिवसेना के राष्ट्रीय कार्यकारिणी को दिए गए अधिकार को अमान्य माना। मूलत: पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी द्वारा सारे अधिकार पार्टी प्रमुख को दिए जाते हैं। इसलिए संजय राऊत ने पूछा कि क्या नार्वेकर को यह भी पता है कि इस पैâसले को किस आधार पर अमान्य किया गया था?

‘यह ट्रिब्यूनल की बेशर्मी की पराकाष्ठा!’ -आदित्य ठाकरे
सामना संवाददाता / मुंबई
यह निर्णय इस ट्रिब्यूनल की निर्लज्जता की पराकाष्ठा है। यह साफ हो गया है कि भाजपा समर्थक गद्दारों की तानाशाही डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान के खिलाफ है। वे लोकतंत्र को खत्म करने के लिए संविधान को फिर से लिखना चाहते हैं। आज इस फैसले ने हमारे राज्य में लोकतंत्र और संविधान के सिद्धांतों और स्तंभों की आधिकारिक तौर पर हत्या कर दी है। लोकतंत्र को पुन: बहाल करने और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा दिए गए देश के संविधान की रक्षा के लिए लड़ेंगे, ऐसा शिवसेना नेता व युवासेनाप्रमुख आदित्य ठाकरे ने कहा। उन्होंने कहा कि ये नतीजा सिर्फ शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के बारे में नहीं था। यह हमारे देश के संविधान और लोकतंत्र के बारे में है। हमें उम्मीद है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट इस घृणित राजनीतिक खेल से संविधान और लोकतंत्र की रक्षा करेगा, ऐसा विश्वास आदित्य ठाकरे ने भी सोशल मीडिया ‘एक्स’ के माध्यम से व्यक्त किया।

‘यह लोकतंत्र का क्रूर उपहास!’
सामना संवाददाता / मुंबई
अगर विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ऐसा फैसला देना ही चाहते थे तो उन्होंने इस फैसले के लिए ९ महीने क्यों लगाए? वे यह फैसला पहले ही दे सकते थे। शिड्यूल-१० के तहत ‘घाती’ गुट के विधायकों को अयोग्य ठहराने के लिए शिवसेना ने शिकायत दर्ज कराई थी। आज इस पर फैसला होने की उम्मीद थी। हालांकि, इस पर कोई फैसला नहीं दिया गया। यह लोकतंत्र का क्रूर उपहास है।’ लोगों को चुनाव में सबक सिखाया जाएगा, लेकिन शिवसेना न्याय पाने के लिए आज के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी।
-सुनील प्रभु, प्रमुख प्रतोद, शिवसेना

‘जनता सब देख रही है’ -प्रियंका चतुर्वेदी
सामना संवाददाता / मुंबई
शिवसेना (उद्धव बाला साहेब ठाकरे) पार्टी की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि मैं यह भी मान लूं कि आपकी संशोधित संविधान में सहमति नहीं थी, तो किसने चुनाव आयोग जाने से आपके हाथ रोके थे। आपको २०२२ में याद आता है कि आपका संविधान क्या है। यह मौकापरस्ती है। जिस चीज को सुप्रीम कोर्ट ने ‘अवैध’ और असंवैधानिक’ कहा था, उसे वैध करने का काम हो रहा है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। आपके पास रिकॉर्ड नहीं था तो आपने एबी फॉर्म को मान्यता कैसे दी। अगर इंट्रा पार्टी डेमोक्रेसी नहीं थी, तो उन गद्दारों ने चुनाव आयोग में शिकायत क्यों नहीं की। यह सब जनता देख रही है कि किस तरह एक पार्टी को तोड़ा गया है। उन्होंने शिवसेना विधायकों की अयोग्यता से संबंधित मसले पर विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मैं बिल्कुल भी आश्चर्यचकित नहीं हूं। देश की जनता से कहा जाता है कि वही होता है, जो संविधान में होता है लेकिन २०१४ के बाद एक नई परंपरा शुरू हुई है ‘वही होता है जो मंजूर-ए-नरेंद्र मोदी और अमित शाह होता है’ यही हम महाराष्ट्र में होते हुए देख रहे है।

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