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ड्रैगन की जासूसी पर ‘डंक’! चीनी ऐप्स बैन के बाद अब हिंदुस्थानी सेना भी सख्त

चीन को दूसरे देशों में ताक-झांक करने की बुरी आदत है। वह जासूसी करने से बाज नहीं आता। अभी कुछ महीने पहले ही उसने अमेरिका के ऊपर अपना जासूसी गुब्बारा उड़ाया था, जिसे अमेरिकी मिसाइल ने मार गिराया था। इसी तरह कुछ समय पूर्व यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग और ट्रिनिटी कॉलेज, डबलिन की एक संयुक्त रिसर्च स्टडी ने तो ड्रैगन की जासूसी की पूरी पोल-पट्टी ही खोलकर रख दी थी। स्टडी के अनुसार, चीनी ब्रांड के एंड्रॉइड स्मार्टफोन में जासूसी ऐप यानी स्पाईवेयर पहले से ही मौजूद रहते हैं, जिनके जरिए मोबाइल उपभोक्ता की जासूसी की जा सकती है। शायद इसीलिए हिंदुस्थानी सेना ने भी अपने ड्रोन में लगनेवाले चीनी कलपुर्जों को बैन करने का पैâसला किया है। इसके तहत सभी ड्रोन निर्माताओं को इस बात की जानकारी दे दी गई है कि वे चीनी कलपुर्जों का इस्तेमाल न करें। उसकी जगह स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल करें या फिर किसी अन्य देश के पुर्जे लगाएं।
दरअसल, ड्रोन में लगनेवाले अधिकांश कल पुर्जे चीन से आते हैं और इलेक्ट्रॉनिक जासूसी के इस दौर में चीन पर भरोसा नहीं किया जा सकता। दूसरी तरफ मोदी सरकार के आने के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। जहां तक ड्रोन का सवाल है तो इंडस्ट्री के जानकार बताते हैं कि हिंदुस्थानी ड्रोन निर्माता करीब ७० फीसदी कलपुर्जों का आयात चीन से करते हैं। ऐसे में अगर चीनी पुर्जों के आयात पर रोक लगती है तो ड्रोन की कीमतें काफी बढ़ जाएंगी। मगर सेना का कहना है कि सस्ते के चक्कर में सुरक्षा के साथ समझौता तो नहीं किया जा सकता।

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