मुख्यपृष्ठनए समाचारभूतिया तालबेहट किले की अजब कहानी... रातभर आती है आत्माओं के चीखने की आवाज!

भूतिया तालबेहट किले की अजब कहानी… रातभर आती है आत्माओं के चीखने की आवाज!

• राजा ने लड़कियों के साथ की थी दरिंदगी
• १५० साल से चिल्लाने की आवाज सुन रहे हैं लोग
सामना संवाददाता / झांसी 
आज के तकनीकी युग में लोग भूत-प्रेत पर विश्वास नहीं करते हैं, लेकिन हिंदुस्थान में कई सारी ऐसी जगहें हैं, जहां लोग भूत-प्रेत के डर से जाने से भी डरते हैं। ऐसा ही एक ललितपुर स्थित तालबेहट किला है, जो यूपी में झांसी के पास है। एक बड़ी झील के पास स्थित तालबेहट किले का निर्माण वर्ष १६१८ में भरत शाह द्वारा किया गया था। जब रानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष कर रही थीं, तब यह महाराजा मर्दन सिंह के क्षेत्र में था। बताया जाता है कि इस किले से लड़कियों के चीखने-चिल्लाने की आवाज आती है। यहां रहनेवाले लोग पिछले १५० साल से लड़कियों की चीखों को सुन रहे हैं। इस किले के दरवाजे पर ७ लड़कियों की पेंटिंग बनी है, जिसकी पूजा की जाती है। इसका राज क्या है, आइए जानते हैं।
 क्या कहते हैं इतिहासकार?
इतिहासकारों के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन ७ लड़कियां राजा मर्दन सिंह के इस तालबेहट किले में नेग मांगने गई थीं। तब राजा के पिता प्रहलाद किले में अकेले थे। लड़कियों की खूबसूरती देखकर उनकी नीयत खराब हो गई और उन्होंने सातों लड़कियों को अपनी हवस का शिकार बना लिया। इससे आहत लड़कियों ने महल के बुर्ज से कूदकर जान दे दी थीं। कहते हैं कि आज भी उन सात लड़कियों की आवाजें तालबेहट किले में सुनाई देती हैं। यह घटना अक्षय तृतीया के दिन हुई थी, इसलिए आज भी यहां यह त्योहार नहीं मनाया जाता है।

लड़कियों के चित्र की होती है पूजा
राजा मर्दन सिंह अपने पिता प्रहलाद की हरकत से आहत हुए। अपने पिता की करतूत का पश्चाताप करने के लिए राजा मर्दन सिंह ने लड़कियों को श्रद्धांजलि के रूप में किले के मेन गेट पर सातों लड़कियों के चित्र बनवाए, जो आज भी मौजूद हैं। गांव की शांति के लिए महिलाएं आज भी किले के मुख्य द्वार पर बने सातों लड़कियों के चित्र की पूजा करने जाती हैं।

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