मुख्यपृष्ठनए समाचारसुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा : `कोई भूखा न सो जाए'......

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा : `कोई भूखा न सो जाए’… अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे अनाज!

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा है कि केंद्र सरकार इस बात को सुनिश्चित करे कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत अनाज अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, `यह सुनिश्चित करना केंद्र सरकार का कर्तव्य है।’ उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि हमारी संस्कृति है कि किसी को भूखा नहीं सोना चाहिए। उसने केंद्र सरकार से यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत खाद्यान्न अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। जस्टिस एम आर शाह और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने केंद्र को निर्देश दिया कि ईश्रम पोर्टल पर पंजीकृत प्रवासी और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की संख्या के साथ ताजा सारिणी जमा करें। मामले में अब आठ दिसंबर को सुनवाई होगी।
यह सुनिश्चित करना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है कि एनएफएसए के तहत खाद्यान्न अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। हम ऐसा नहीं कह रहे कि केंद्र कुछ नहीं कर रहा। केंद्र सरकार ने कोविड के दौरान लोगों तक अनाज पहुंचाया है। हमें यह भी देखना होगा कि यह जारी रहे। `हमारी संस्कृति है कि कोई खाली पेट नहीं सोए।’ पीठ कोविड महामारी तथा उसके बाद लॉकडाउन के दौरान प्रवासी श्रमिकों की हालत से संबंधित विषय पर स्वत: एक जनहित मामले पर सुनवाई कर रही थी।

खाद्यान्न का कोटा खत्म
भूषण ने कहा कि केंद्र सरकार दावा कर रही है कि लोगों की प्रति व्यक्ति आय पिछले कुछ सालों में बढ़ गई है, लेकिन भारत वैश्विक भुखमरी सूचकांक में तेजी से नीचे आ गया है। केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि एनएफएसए के तहत ८१.३५ करोड़ लाभार्थी हैं जो भारतीय परिप्रेक्ष्य में भी काफी बड़ी संख्या है। भूषण ने कहा कि १४ राज्यों ने हलफनामे दाखिल कर कहा है कि उनका खाद्यान्न का कोटा खत्म हो चुका है।

सभी जरूरतमंदों को मिले लाभ
सामाजिक कार्यकर्ताओं अंजलि भारद्वाज, हर्ष मंदर और जगदीप छोकर की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि २०११ की जनगणना के बाद देश की आबादी बढ़ गई है और उसके साथ ही एनएफएसए के दायरे में आनेवाले लाभार्थियों की संख्या भी बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि यदि कानून को प्रभावी तरीके से लागू नहीं किया गया तो कई पात्र और जरूरतमंद लाभार्थी इसके फायदों से वंचित रह जाएंगे।

अन्य समाचार