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सामाजिक बहिष्कार के दंश की दास्तां… ‘जुर्माना दो और पैर पकड़कर माफी मांगों’

सामना संवाददाता / छत्तीसगढ़
कभी-कभार कुछ ऐसे मामले हमारे सामने आ जाते हैं, जो हमें ये सोचने पर मजबूर कर देते हैं कि क्या हम वाकई २१वीं सदी में जी रहे हैं? एक ओर जहां आज हम चांद पर जाने की बातें करते हैं, वहीं दूसरी ओर रूढ़िवादी सोच के चलते सामाजिक बहिष्कार के मामले भी सामने आते हुए नजर आते हैं।
भारत जैसे बहुधर्मी और विविधतापूर्ण देश में समाज में कई प्रकार की विषमताएं और भ्रांतियां मौजूद हैं, जिनमें से प्रमुख है सामाजिक बहिष्कार। सामाजिक और जातिगत स्तर पर सक्रिय पंचायतों द्वारा सामाजिक बहिष्कार के मामले लगातार सामने आते रहते हैं। ग्रामीण भागों में ऐसी घटनाएं कई बार देखने को मिलती हैं, जिसमें जाति व समाज से बाहर विवाह करने, समाज के मुखिया का कहना न मानने, पंचायतों के मनमाने फरमान व फैसलों का सिर झुकाकर न पालन करने पर किसी व्यक्ति या उसके समूचे परिवार को समाज व जाति से बहिष्कृत कर दिया जाता है व उसका समाज में हुक्का-पानी बंद कर दिया जाता है। कुछ इसी तरह का मामला हाल ही में कोरबा में देखने को मिला। बता दें कि छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में सामाजिक बहिष्कार का मामला सामने आया है। राताखार क्षेत्र में रहनेवाले कहरा परिवार को समाज के लोगों ने बहिष्कृत कर रखा है। दबंगों की वजह से परिवार काफी दिक्कतों में है। परिवार के सदस्य मदद की गुहार लगाने शनिवार को एसपी दफ्तर पहुंचे। पीड़ित परिवार का कहना है कि समाज के लोगों की करतूतों की वजह से घर से निकलना दूभर हो गया है। दबंगों ने अब नई शर्त रख दी है। खर्च की भरपाई के साथ वे सभी का पैर छूकर माफी मांगने को कह रहे हैं।
बता दें कि कोतवाली पुलिस थाना के राताखार निवासी गीता कहरा और उसके परिवार को समाज द्वारा बिना किसी कारण के कुछ महीने पहले बहिष्कृत किया गया है। गीता ने बताया कि जिला प्रशासन से पहले भी इसकी शिकायत की थी। जांच करने अधिकारी भी आए थे। उस वक्त लोगों द्वारा प्रशासनिक अफसरों व पुलिस को बताया गया कि बहिष्कार समाप्त कर दिया गया है, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है। पीड़ित परिवार ने बताया कि समाज में शामिल होने के लिए अब नई शर्त रखी जा रही है। महिला ने समाज के कुछ लोगों का नाम बताते हुए आरोप लगाया कि पुलिस थाना के चक्कर में जितना खर्च हुआ है, उसकी भरपाई की जाए और सभी सदस्यों का पैर छूकर माफी मांगी जाए। इसके बाद ही उन्हें समाज में वापस लिया जाएगा।

एसपी से शिकायत, महिला आयोग भी जाएंगी

गीता ने कहा का कहना है कि २० जनवरी, २०२२ में उसने एसपी दफ्तर में शिकायत की थी, जिसके बाद कोतवाली थाना के पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी बुलाए गए थे। समाज व मोहल्ले के लोगों को भी बुलाया गया था। उस दौरान समाज से बहिष्कृत नहीं होने की बात कही गई थी। गीता ने बताया कि भाई के घर छट्ठी का कार्यक्रम है, हमें उसे भी करने नहीं दिया गया। परिवार के सदस्यों की शादी भी करनी है, लेकिन ऐसी स्थिति में सामाजिक समस्याएं सामने आ रही हैं। गीता ने बताया कि एसपी व जिला प्रशासन को फिर से शिकायत की है। प्रदेश महिला आयोग के पास जाकर उनसे न्याय की मांग करूंगी।

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