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शर्मसार हुआ शिक्षा का मंदिर … सरकारी स्कूल में बच्चे खेल रहे जुआ!

योगेंद्र सिंह ठाकुर / पालघर
शिक्षा प्रणाली में सुधार लाने के लिए केंद्र से लेकर राज्य सरकारें तमाम दावे करती रहती हैं। इसके बावजूद पालघर के सरकारी स्कूलों की स्थिति दयनीय बनी हुई है। जिले के आदिवासी इलाकों में तो शिक्षा का स्तर सुधरने की बजाय दिन-ब-दिन बिगड़ता ही जा रहा है। शिक्षा के मंदिर में ही छाए घोर अंधेरे की एक और शर्मसार कर देनेवाली तस्वीर तलासरी इलाके से सामने आई है। डिजिटल इंडिया के जश्न के बीच यहां जिला परिषद के एक सरकारी स्कूल के बच्चों का कक्षा में ही जुआ खेलने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि स्कूल में एक ही शिक्षक है, जिसने अपनी जगह दूसरे शिक्षक को पढ़ाने के लिए रखा और खुद बिना किसी छुट्टी के गांव चले गए।
पालघर जिला परिषद के शिक्षा विभाग के कुप्रबंधन का यह कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि बार-बार शिक्षा विभाग में व्याप्त खामियां उजागर हो रही हैं, फिर भी शिक्षा विभाग के अधिकारियों की कुंभकर्णी नींद टूट नहीं रही है। स्कूल की कक्षा में जुआ खेलते बच्चों की शर्मनाक तस्वीर सामने आने के बाद लोगों का कहना है कि पालघर जिला परिषद के खासकर आदिवासी इलाकों के स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के भविष्य पर अंधकार की तलवार लटक रही है। चौतरफा किरकिरी के बीच शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा है, कि जांच के बाद दोषी पर कार्यवाही की जाएगी।

यूनिफॉर्म में छात्र कक्षा में ही खेल रहे जुआ
तलासरी तालुका के सूत्रकार डोंगरपाड़ा में पहली से चौथी तक जिला परिषद स्कूल है। इस स्कूल में एक ही शिक्षक है। स्कूल में कार्यरत शिक्षक ने बिना किसी मंजूरी के ३०० रुपए रोजाना के मानदेय पर एक सेवानिवृत्त शिक्षक को अपनी जगह रखकर खुद अपने गांव चले गए। सेवानिवृत्त शिक्षक भी किसी कार्य से स्कूल से बाहर गए थे। इसी बीच बच्चों ने कक्षा में ही स्कूल ड्रेस में जुआ खेलना शुरू कर दिया। लोगों को जब बच्चों के हाथों में किताबों की जगह ताश के पत्ते दिखे तो वह आक्रोश से भर उठे और दोषी शिक्षक पर कड़ी कार्यवाही की मांग की है।

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