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क्लेम का मोह ‘कमीना’ होता है! एक करोड़ के लिए दो बार ‘मर’ गया शख्स

  •  दो साल तक घर में रहा ‘कैद’
  •  पड़ोसियों को पत्नी कहती,‘वे नहीं रहे’

एक करोड़ रुपए के क्लेम के लालच में एक व्यक्ति ने खुद को दो बार मार डाला। इतना ही नहीं इस फर्जीवाड़े के खेल में उसकी पत्नी ने भी साथ दिया। खुद को मरा हुआ साबित करने के लिए घर में २ साल तक कैद रहा। इतना ही नहीं पत्नी को जब कोई कहता कि आपके पति कहा हैं? तो वह करती थी वे अब नहीं रहे। ऐसा कारनामा किया है अलवर के मनु मार्ग निवासी नीरज ने। यह खेल कोरोना के दौरान जब लोगों की मौतों का आंकड़ा बढ़ने लगा और स्थानीय निकाय की ओर से डेथ सर्टिफिकेट जारी होने लगे तो इसका फायदा नीरज ने भी उठा लिया। इतना ही नहीं नीरज ने दो बार नगर परिषद से मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया। फर्जीवाड़े की दूसरी कोशिश में वह पकड़ा गया। पता चला कि डेथ क्लेम की १ करोड़ रुपए राशि उठाने के लिए उसने फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया था। इससे पहले वह मैरिज होम का १६ लाख रुपए के किराया बचाने के लिए खुद का डेथ सर्टिफिकेट बनवा चुका था। अब पुलिस ने नीरज को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
फर्जीवाड़े की रची साजिश
कोतवाली थाने के एसएचओ राजेश शर्मा ने बताया कि पिता की मौत के बाद नीरज ने कोरोना का फायदा उठाकर खुद का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया। उस दौरान मौतों के कई मामले आ रहे थे। इस दौरान श्मशान घाट व नगर परिषद में चालाकी से खुद को कागजों में मृत दिखा नीरज ने डेथ सर्टिफिकेट बनवा लिया। १६ लाख चुकाने से बचने के लिए उसने डेथ सर्टिफिकेट कोर्ट में भी पेश भी करा दिया। वह खुद के घर से निकलना बंद कर दिया। पत्नी हर किसी को यही कहने लगी कि वे मर चुके हैं।
नीरज कर चुका है दो शादियां
डेथ सर्टिफिकेट बनने के बाद नीरज कहीं जाता नहीं था। पूछने कोई आता तो पत्नी कह देती थी कि वो कोरोना से मर गए। बीमा पॉलिसी भी कराई थी। मृत्यु प्रमाण पत्र ले लिया। नीरज का दूसरा भाई संजय शर्मा भी मनु मार्ग पर रहता है। दोनों एक ही मकान में रहते हैं। कोतवाली के हेड कांस्टेबल रोहिताश ने बताया कि नीरज दो शादी कर चुका है। पहली पत्नी को छोड़ चुका था। दूसरी पत्नी प्राइवेट कॉलेज में लेक्चरर है।
बीमा पाने की भी कोशिश
डेथ सर्टिफिकेट हाथ में आते ही नीरज ने प्लान बी पर काम शुरू कर दिया था। उसने अपना एड्रेस बदलकर बख्तल की चौकी के पास अस्थाई निवासी बताया। बैंक में ५०-५० लाख के बीमा की दो पॉलिसी खरीदी। पहले साल की ३८-३८ हजार रुपए की किश्त भी जमा करा दी। इसके बाद कोरोना में मृत्यु होने पर ट्रांसपोर्ट नगर में अंतिम संस्कार होना दिखाकर नगर परिषद से फर्जी डेथ सर्टिफिकेट बनवाकर १ करोड़ की बीमा रकम के लिए क्लेम कर दिया। लेकिन इसकी चालाकी तब खुल गई जब कुछ लोगों ने उसे देख लिया।

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