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‘लंपी’ का टेंशन!  पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में हाहाकार; मान सरकार ने खरीदे ६६ हजार से ज्यादा टीके

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
कोरोना महामारी से उबरने की कोशिश कर रहे हिंदुस्थान को अब मवेशियों में फैलने वाला त्वचा रोग लंपी टेंशन देने लगा है। पंजाब सरकार ने राज्य में मवेशियों में लंपी त्वचा रोग के प्रसार की रोकथाम के लिए हैदराबाद से बकरी के चेचक के टीके की ६६,००० से अधिक खुराकें खरीदी हैं। पंजाब के पशुपालन, मत्स्य पालन और डेयरी विकास मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर ने रविवार को कहा कि यह टीके स्वस्थ पशुओं को निशुल्क लगाए जाएंगे। लंपी त्वचा रोग कैप्रीपोक्स वायरस के कारण होता है, जो गायों और भैंसों को संक्रमित करता है।
इस रोग के संक्रमण के चलते जानवर का वजन घटने लगता है और दूध की मात्रा कम होने के साथ-साथ बुखार और मुंह में घाव हो सकते हैं। कुछ मामलों में इसके कारण रोगग्रस्त पशुओं की मौत भी हो जाती है। पंजाब, राजस्थान, उत्तराखंड, गुजरात और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह इस बीमारी के प्रकोप की चपेट में हैं। शनिवार तक के आंकड़ों के मुताबिक पंजाब में पिछले एक महीने में लंपी त्वचा रोग के कारण ४०० से अधिक मवेशियों की मौत हो चुकी है और लगभग २०,००० संक्रमित हो चुके हैं, जिनमें ज्यादातर गाय हैं।
संक्रामक बीमारी है लंपी
सामान्यत पशुओं में होने वाली लंपी स्किन डिजीज एक संक्रामक बीमारी है। ये बीमारी बहुत ही तेजी से फैलती है। इसके वाहक मच्छर, मक्खी, जूं इत्यादि हैं। इन परजीवियों के काटने के बाद जब वो दूसरे जानवरों को काटते हैं तो उनके खून से वायरस दूसरे जानवरों के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। ये बीमारी सीधे संपर्क में आने से भी फैलती है, इसके अलावा ये बीमारी दूषित भोजन से भी जानवरों में फैलती है। इस बीमारी से पशुओं में तमाम लक्षण दिखाई देने के साथ ही उनकी मृत्यु होने का भय भी बना रहता है। पंजाब में संक्रमित मवेशियों की सूचना ज्यादातर डेयरी फार्मों से मिली है।
गायों का दूध न पीने की सलाह
केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने शनिवार को कहा कि देश में ‘लंपी’ रोग से सबसे ज्यादा प्रभावित राजस्थान है और राज्य के ११ जिले गंभीर रूप से प्रभावित हैं। उन्होंने ‘लंपी’ रोग से संक्रमित गायों का दूध नहीं पीने की चेतावनी दी है। रूपाला ने संक्रमित गायों को आइसोलेशन में रखने और स्वस्थ पशुओं के टीकाकरण की बात भी कही।

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