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उल्टा चिल्ला रहे हैं चोर!

सामना संवाददाता / मुंबई

धारावी पुनर्विकास परियोजना को अडानी के गले में उतारने के विरोध में शिवसेना के नेतृत्व में विशाल सर्वदलीय मोर्चा ने अडानी को झटका दिया है। अडानी को चिंता सताने लगी है कि मित्र की मदद से दहेज में मिली यह परियोजना कहीं हाथ से निकल तो नहीं रही है। वहीं धारावीकरों की विराट ताकत को देखकर सत्ताधारियों की भी मिट्टी पलीद होती नजर आ रही है। इसीलिए कल अडानी की तरफ से डीआरपीपीएल द्वारा कमजोर खुलासा करने का प्रयास किया गया। लेकिन ये उन चोरों की उल्टे चिल्लाहट है। इस तरह का जोरदार हमला शिवसेना द्वारा किया गया। साथ ही धारावी पुनर्विकास परियोजना अडानी के पास वैâसे गया, इसका लेखा जोखा भी सामने रखते हुए पूरी तरह से पर्दाफाश किया गया।
शिवसेना नेता व सांसद विनायक राऊत ने इस संबंध में एक परिपत्र निकाल कर घाती सरकार द्वारा अडानी की झोली में धारावी कितनी सहजता से डाल दी गई, इसका सविस्तार बताया उल्लेख किया है। धारावी सिर्पâ एक झोपड़पट्टी नहीं बल्कि एक व्यवसाय नगरी है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि धारावी का पूर्ण पुनर्विकास होना ही चाहिए। धारावी में लगभग एक लाख आवासीय घरों के साथ-साथ कम से कम ४० हजार छोटे और बड़े व्यवसाय हैं, जिन पर लाखों लोग आश्रित हैं।
भाजपा सरकार जिस तरीके से मैच फिक्सिंग करते हैं, उसी तरह धारावी के पुनर्विकास के लिए मेसर्स अडानी प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड को निविदाकर्ता के रूप में चुना। २२ दिसंबर २०१३ को वैâबिनेट की बैठक में इस नियुक्ति को मंजूरी दी गई। ५ मार्च २०१८ से ७ नवंबर २०२३ की अवधि के दौरान राज्य सरकार ने धारावी के पुनर्विकास के संबंध में कई जीआर जारी किए। १ नवंबर, २०२२ को अतिरिक्त परियोजना रियायतों के नाम पर जीआर निकाला गया और रियायतों की खैरात दी गई। उसके बाद २८ जुलाई २०२२ और ९ नवंबर २०२२ को वैâबिनेट की बैठक कर फिर से अतिरिक्त रियायतें दी गर्इं।
अडानी के लिए सौभाग्य की बात है कि ५ मार्च २०१८ को सौभाग्य से देवेंद्र फडणवीस ही मुख्यमंत्री थे। इसके बाद १० अक्टूबर २०१८ को हुई वैâबिनेट बैठक में धारावी पुनर्विकास परियोजना को विभिन्न रियायतें देते हुए एक विशेष प्रयोजन से ‘एसपीवी’ वंâपनी भी बनाई गई।
५ मार्च २०१८ के बाद २८ सितंबर २०२१ से ७ नवंबर २०२३ की अवधि के दौरान धारावी के पुनर्विकास के संबंध में कई अध्यादेश जारी किए गए और उनमें से प्रत्येक अध्यादेश पूरी तरह से और विशेष रूप से मेसर्स अडानी प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड को लाभ पहुंचाने के साथ ही विभिन्न सुविधाओं के लिए जारी किया गया।
इस अवधि में अडानी की किस्मत में मुख्यमंत्री के रूप में एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री के रूप में देवेंद्र फडणवीस भी शामिल थे। दरअसल, गृहनिर्माण विभाग से हटने के एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गृह निर्माण विभाग के माध्यम से अडानी को अधिकार पत्र देने का काम पूरा कर लिया।

धारावीकरों को १७ साल का वनवास

अडानी प्रॉपर्टीज प्रा. लि. वंâपनी पर सहुलियतों की बौछार करनेवाले लेटर ऑफ इंटेंट (एलओवाई) मतलब ही पुनर्विकास में होनेवाले निर्माण कार्यों की रूपरेखा मिलने के बाद से टीडीआर बिक्री वाला अडानी का दुकान शुरू होगा और धारावीकरों को केवल परियोजना पूरा होने के लिए १७ साल तक दीर्घकालिक प्रतीक्षा करनी पड़ेगी। यह अडानी और भाजपा की कृपा से हुआ है। इस तरह का तंज सांसद राऊत ने कसा है।

महाविकास आघाड़ी सरकार ने क्या अन्याय किया वो दिखा दो

अब महाविकास आघाड़ी सरकार के काल में कौन से पैâसले से डीआरपीपीएल को सहूलियतों की खैरात बांटी गई और धारावीकरों पर अन्याय किया, ये दिखा दो। इस तरह का आह्वान सांसद राऊत ने किया। अडानी पर विशेष रियायतों की बौछार करने के लिए जो जीआर जारी किए गए किसी भी जीआर में धारावी में निवासी और अनिवासी अस्थापनाओं को वास्तव में कितनी जगह देंगे, इसका कहीं भी उल्लेख नहीं है। २८ सितंबर २०२३ के जीआर में उल्लेख है कि म्हाडा के माध्यम से केवल ३०० वर्गपुâट क्षेत्रफल के फ्लैट का निर्माण किया जा रहा है।

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