मुख्यपृष्ठविश्वश्रीलंका में बढ़ा गृह युद्ध का खतरा, नेवल बेस में छिपे राजपक्षे!

श्रीलंका में बढ़ा गृह युद्ध का खतरा, नेवल बेस में छिपे राजपक्षे!

• हिंसा करनेवालों को गोली मारने के आदेश
• हिंसा के दौरान ८ प्रदर्शनकारियों की हुई मौत
एजेंसी / कोलंबो । श्रीलंका में आर्थिक संकट के बाद पैदा हुए हालात उसे सिविल वॉर की तरफ धकेलते नजर आ रहे हैं। सोमवार को महिंदा राजपक्षे ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद वो परिवार के साथ नेवी के एक बेस में छिप गए हैं। बाहर प्रदर्शनकारी मौजूद हैं। ये राजपक्षे को बाहर निकालने की मांग कर रहे हैं। उधर सोमवार को हुई हिंसा में मरनेवालों का आंकड़ा ८ हो गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक पूर्व पीएम महिंदा राजपक्षे और उनके परिवार ने पूर्वी श्रीलंका के त्रिंकोमाली नेवल बेस में पनाह ली है। उन्हें एक हेलिकॉप्टर के जरिए बेस तक ले जाया गया। इस बीच श्रीलंका की डिफेंस मिनिस्ट्री ने एक ऑर्डर जारी किया है। इसमें सेना को हिंसा और लूटपाट करनेवालों को गोली मारने का अधिकार दिया गया है।
महिंदा को गिरफ्तार करने की मांग
विपक्षी नेताओं ने कल महिंदा को गिरफ्तार करने की मांग की है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि महिंदा ने शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे लोगों को उकसाया और हिंसा भड़काई। प्रदर्शनकारियों ने सोमवार को हंबनटोटा में महिंदा राजपक्षे के पुश्तैनी घर को आग के हवाले कर दिया था, वहीं राजधानी कोलंबो में पूर्व मंत्री जॉनसन फर्नांडो को कार सहित झील में फेंक दिया। अब तक १२ से ज्यादा मंत्रियों के घर जलाए जा चुके हैं।
प्रधानमंत्री आवास के अंदर फायरिंग
रिपोर्ट के मुताबिक हजारों प्रदर्शनकारियों ने पीएम के आधिकारिक आवास ‘टेंपल ट्री’ का मेन गेट तोड़ दिया, यहां खड़े ट्रक में आग लगा दी थी। इसके बाद आवास के अंदर गोलीबारी भी की गई। उग्र होती भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और हवाई फायरिंग की।
सांसद अमरकीर्ति अथुकोरला की मौत
बीते दिनों श्रीलंकाई सांसद अमरकीर्ति अथुकोरला की मौत की खबर भी सामने आई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमरकीर्ति ने प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग कर दी थी और बाद में भीड़ से बचने के लिए बिल्डिंग में छिप गए। यहीं से उनका शव बरामद हुआ है। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हुआ है कि उनकी मौत किस वजह से हुई है।
एक महीने में २ बार लगा आपातकाल
खराब आर्थिक हालात के मद्देनजर आम लोगों ने नेशनल असेंबली में हिंसक प्रदर्शन किए थे। इसके बाद राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने फिर से आपातकाल लगाने की घोषणा की थी। श्रीलंका में एक महीने बाद दोबारा आपातकाल लगाया गया है। इसके पहले १ अप्रैल को भी आपातकाल लगाया गया था, जिसे ६ अप्रैल को हटा दिया गया था।

 

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