मुख्यपृष्ठनए समाचारयूपी में अराजकवाद का शीर्ष जज भी मांगने लगे इच्छा मृत्यु!

यूपी में अराजकवाद का शीर्ष जज भी मांगने लगे इच्छा मृत्यु!

सामना संवाददाता / लखनऊ

महिला जज ने लगाया जिला जज पर उत्पीड़न का आरोप
सुप्रीम कोर्ट ने लिया मामले का संज्ञान

केंद्र की भाजपा सरकार `बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा देती है। केंद्र की राह पर ही उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भी चलने का दावा करती है, लेकिन सिर्फ कहने के लिए। राज्य में महिलाओं से संबंधित अपराध आए दिन सुर्खियों में छाए रहते हैं। यूपी में अराजकवाद शीर्ष पर पहुंच चुकी है। आम महिला की बात कौन करे, न्याय देने वालों को भी न्याय नहीं मिल पा रहा है। कानून व्यवस्था की हालत इतनी खराब हो गई है कि जज भी इच्छा मृत्यु की गुहार लगाने लगे हैं। राज्य की एक महिला जज ने जिला जज पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है। पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखा है। पत्र वायरल होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर संज्ञान लिया है।

मिली जानकारी के अनुसार, बांदा में तैनात सिविल जज अर्पिता साहू ने इच्छा मृत्यु की गुहार लगाई है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को लिखे पत्र में गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि पत्र को लिखने का उद्देश्य मेरी कहानी बताने और प्रार्थना करने के अलावा कुछ और नहीं है। मैं बहुत उत्साह के साथ न्यायिक सेवा में शामिल हुई, सोचा था कि आम लोगों को न्याय दिला पाऊंगी। मुझे क्या पता था कि न्याय के लिए हर दरवाजे का भिखारी बना दिया जाएगा। मुख्य न्यायाधीश को संबोधित पत्र में उन्होंने कहा है कि काफी निराश मन से लिख रही हूं। आरोप है कि बाराबंकी में तैनाती के दौरान सिविल जज अर्पिता साहू को प्रताड़ना से गुजरना पड़ा। जिला जज पर शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का आरोप है। उन्होंने आरोप लगाया कि रात में भी जिला जज से मिलने के लिए कहा गया।

किसी ने परेशानी नहीं समझी

अर्पिता साहू ने कहा कि मैंने मामले की शिकायत इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से २०२२ में की। आज की तारीख तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। मेरी परेशानी को जानने की किसी ने परवाह भी नहीं की। जुलाई २०२३ में मैंने मामले को एक बार फिर इलाहाबाद हाई कोर्ट की आंतरिक शिकायत समिति के सामने उठाया। जांच शुरू करने में ६ महीने और एक हजार ईमेल लग गए। उन्होंने प्रस्तावित जांच को दिखावा बताया है। गवाह जिला जज के अधीनस्थ हैं।

यौन उत्पीड़न के साथ जीना सीख लें

महिला जज ने अपनी चिट्ठी में लिखा कि वो बेहद उत्साह से जज की परीक्षा देकर न्यायिक सेवा में आई थी, लेकिन उसे भरी अदालत में दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि एक पोस्टिंग के दौरान जिला जज और उनके करीबियों ने उनका मानसिक और शरीरिक शोषण किया। दावा ये भी है कि जिला जज ने उसे रात में मिलने का दबाव बनाया। इसके अलावा महिला जज ने अपने पक्ष में कामकाजी महिलाओं से कहा है कि वे भी यौन उत्पीड़न के साथ जीना सीख लें। बेहद कड़ी भाषा में महिला जज ने लिखा कि वह जज होने के बावजूद अपने आपको न्याय नहीं दिला पा रही हैं।

चीफ जस्टिस ने रिपोर्ट तलब की

महिला जज की इच्छा मृत्यु वाली वायरल चिट्ठी पर चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने संज्ञान लेते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट से रिपोर्ट तलब की है। सूत्रों के मुताबिक, देर रात सीजेआई ने सुप्रीम कोर्ट सेकेट्री जनरल अतुल एम कुरहेकर को इलाहाबाद हाई कोर्ट प्रशासन से स्टेटस रिपोर्ट मंगाने का आदेश दिया। सेकेट्री जनरल ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को पत्र लिखकर महिला जज द्वारा दी गई सारी शिकायतों की जानकारी मांगी है। इसके साथ ही शिकायत से निपटने वाली आंतरिक शिकायत समिति के समक्ष कार्यवाही की स्थिति के बारे में भी पूछा है। यह कदम सोशल मीडिया पर चिट्ठी वायरल होने के बाद उठाया गया है।

अन्य समाचार