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सुरंग नहीं है सुरक्षित! … कभी भी घट सकती है भीषण घटना

ठाणे मनपा, वन विभाग और रेलवे प्रशासन की लापरवाही है वजह
सामना संवाददाता / ठाणे
मुंब्रा और कलवा स्टेशन के बीच अहम मानी जानेवाली पारसिक सुरंग की हालत बेहद खराब हो गई है और इस सुरंग के आस-पास अवैध निर्माण बढ़ने लगा है। सुरंग के दोनों ओर कचरा का साम्राज्य है। साथ ही टनल के ऊपर से रिक्शा, टेंपो और दोपहिया वाहनों का आवागमन भी शुरू हो गया है। सुरंग अब सुरक्षित नहीं है, जिसकी वजह मनपा, वन विभाग और रेलवे प्रशासन की लापरवाही को बताया जा रहा है।
बता दें कि १०० साल से अधिक पुरानी पारसिक सुरंग मध्य रेलवे की ५वीं और ६ठीं रेलवे लाइन पर स्थित है। ठाणे से दिवा नई लाइन के खुलने से पहले, तेज उपनगरीय, एक्सप्रेस और मालगाड़ियां इस सुरंग से होकर गुजरती थीं। कुछ महीने पहले एक नई लाइन के निर्माण के बाद सुरंग से अब केवल एक्सप्रेस और मालगाड़ियां चलती हैं। पिछले कुछ वर्षों में इस सुरंग क्षेत्र में बड़ी संख्या में अवैध निर्माण हुए हैं। साथ ही नागरिकों द्वारा ट्रैक पर फेंके गए कूड़े-कचरे की आलोचना होने के बाद ठाणे मनपा, रेलवे प्रशासन और वन विभाग द्वारा इलाके का सर्वेक्षण किया गया था। इसके बाद इस इलाके में वन विभाग और ठाणे मनपा ने कुछ दिनों तक कार्रवाई की और टनल के ऊपर कचरा हटाकर पौधे लगाए थे, लेकिन अब सुरंग की सुरक्षा की अनदेखी शुरू कर दी है। इस वजह से एक बार फिर पारसिक सुरंग पर खतरा मंडराने लगा है।
रेलवे यात्रियों को भी है खतरा..
पिछले कुछ दिनों में पारसिक इलाके में अवैध कब्जा व निर्माण शुरू हो गया है और कूड़ा-कचरा फेंके जाने से टनल के दोनों ओर कूड़े का साम्राज्य फिर से पैâल गया है। मनपा द्वारा लगाए गए पौधे भी सूख गए हैं। इस सुरंग के ऊपर दो स्कूल हैं। साथ ही, सुरंग के एक छोर से दूसरे छोर तक जाने के लिए नागरिक रिक्शा, दोपहिया वाहनों का उपयोग करते हैं। यदि दुर्भाग्यवश कोई घटना घटती है तो इन वाहनों के ट्रैक पर गिरने की संभावना है।

हम पिछले छह से सात वर्षों से पारसिक सुरंग पर अतिक्रमण पर नजर रख रहे हैं, लेकिन वन विभाग और ठाणे मनपा ध्यान नहीं दे रहे हैं। यदि यह सुरंग ढह गई तो भारी जनहानि होगी। इस सुरंग को बचाने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए।’
-सिद्धेश देसाई, अध्यक्ष
(कलवा-पारसिक रेलवे पैसेंजर्स एसोसिएशन)

 

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