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जटिलताओं के बीच महिला बनी मां …प्लेसेंटा प्रीविया और फाइब्रॉइड से थी पीड़ित

१,००० गर्भधारण पर ५.२ फीसदी प्लेसेंटा प्रीविया की मिलती है शिकायत
सामना संवाददाता / मुंबई
प्लेसेंटा प्रीविया और फाइब्रॉइड जैसी जटिलताओं से जूझ रही एक ३२ वर्षीय महिला मां बनी है। महिला ने २.७ किलो के एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया है। चिकित्सकों के मुताबिक जच्चा-बच्चा दोनों की सेहत अब अच्छी है। बताया गया है कि प्लेसेंटा की शिकायत १,००० गर्भधारण पर ५.२ फीसदी महिलाओं में दिखाई देती है। नई मुंबई के उरण निवासी अनामिका मेहता (बदला हुआ नाम) को गर्भावस्था के ५वें महीने में नियमित जांच के दौरान सोनोग्राफी की गई तो पता चला की महिला के गर्भाशय के ऊपरी हिस्से में प्लेसेंटा प्रीविया दिखाई दिया। हालांकि अक्सर यह निचले हिस्से में होता है। इसके साथ ही उसमें एक फाइब्रॉइड का भी पता चला। ऐसी स्थिति में मरीज को खारघर के मदरहुड अस्पताल में इलाज कराने की सलाह दी गई। अस्पताल में प्रसूति व महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. शैफाली पाटील ने कहा कि कंप्लीट प्लेसेंटा प्रीविया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें प्लेसेंटा गर्भाशय के मुख को बंद करता है। प्लेसेंटा प्रीविया की कुल व्यापकता प्रति १,००० गर्भधारण पर ५.२ है। प्लेसेंटा प्रीविया से जुड़े खतरों में गर्भावस्था या प्रसव के दौरान योनि से गंभीर रक्तस्राव हो सकता है। अत्यधिक रक्तस्राव से एनीमिया, सदमा लग सकता है। इतना ही नहीं आपात सर्जरी की आवश्यकता भी हो सकती है। इसमें बच्चे को ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की कमी होती हैं, जिससे समय से पहले प्रसूती हो सकती हैं। इसके साथ ही प्लेसेंटा के गर्भाशय की दीवार से गहराई से जुड़ने का खतरा बढ़ सकता है, जिसमें हिस्टेरेक्टॉमी की आवश्यकता होती है। गर्भावस्था के दौरान मरीज के पेट में तेज दर्द हो रहा था। उनके दर्द को कम करने के लिए उन्हें पेरासिटामोल और एंटासिड इंजेक्शन दिए गए। मरीज की सेहत में सुधार देखकर उन्हें डिस्चार्ज दिया गया।

गर्भावस्था में माना जाता है दुर्लभ और खतरनाक स्थिति
डॉ. पाटील ने कहा कि निचले अंडे का प्रत्यारोपण और गर्भाशय की परत में असामान्यताएं प्लेसेंटा प्रीविया के कारण होती हैं। इसे गर्भावस्था में एक दुर्लभ और खतरनाक स्थिति माना जाता है। उन्होंने कहा कि हमारी टीम ने उनकी गर्भावस्था पर बारीकी से नजर रखते हुए नियमित जांच और सोनोग्राफी की। इसमें पाया गया कि प्लेसेंटा गर्भाशय में नीचे स्थित था और पूरी तरह से गर्भाशय ग्रीवा को ढक रहा था। इस कारण बड़े रक्तस्राव या समय से पहले प्रसव का खतरा था।

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