मुख्यपृष्ठनए समाचार‘बिना मुल्क जीनेवाले बलूचों की मदद करे दुनिया!’-नायला कादरी

‘बिना मुल्क जीनेवाले बलूचों की मदद करे दुनिया!’-नायला कादरी

बलूच खुली हवा में सांस लेने के लिए दशकों से तड़प रहा है। बलूच १९४८ से ही पाकिस्तान के चंगुल में जकड़ा हुआ है, लेकिन अब उसकी आजादी के प्रयास तेजी से हो रहे हैं। बलूच की निर्वासित प्रधानमंत्री ‘नायला कादरी’ अपने मुल्क की स्वतंत्रता के लिए दुनिया के तमाम देशों में जा-जाकर समर्थन मांग रही हैं। इस वक्त वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगा रही हैं कि यूएन में उनके समर्थन में वो आवाज उठाएं। बलूचों को हिंदुस्थान से ही उम्मीदें हैं, जैसे पाकिस्तान से बांग्लादेश को आजाद करवाया, ठीक वैसा ही करिश्मा वे अपने लिए चाहते हैं। बलूच प्रधानमंत्री बीते दो सप्ताह से हिंदुस्थान में हैं और कई विपक्षी नेताओं सहित जिम्मेदार व्यक्तियों से वो मिल रही हैं। इस बीच डॉ. रमेश ठाकुर ने उनसे विस्तृत बातचीत की। पेश है, बातचीत के प्रमुख अंश-

• बलूचिस्तान के दुनिया से अलग-थलग होने के पीछे के कारणों को बताएं?
युवा पीढ़ी बलूचियों के संबंध में कुछ नहीं जानती। उम्र का एक पड़ाव पार कर चुके बुजुर्ग और इतिहासकार अच्छे से जानते हैं कि १९४८ से लेकर आज तक बलूचिस्तानियों पर पाकिस्तान कितना जुल्म बरपाता आया है। दरअसल, बलूच होना ही उनके लिए गुनाह होता है। हमें मारने और किस्म-किस्म के अत्याचार करने का जैसे उन्हें लाइसेंस मिला हो। इस खेल में अब चीन भी शामिल हो चुका है। बहन-बेटियों को उनकी आर्मी सरेआम उठा लेती है। उनके साथ कई-कई दिनों तक मिलकर आर्मी जवान रेप करते हैं। अफसोस, ये खेल दुनिया देखकर भी चुप है। हम बिना मान्यता वाले मुल्क के बाशिंदे हैं। मान्यता मिलने की मदद की चाह लेकर हम प्रत्येक ताकतवर मुल्क की चौखट पर जाकर गिड़गिड़ा रहे हैं, उनसे गुजारिशें करते हैं, पर कहीं से भी अब तक हमें मुकम्मल आश्वासन नहीं मिला।
• हिंदुस्थान आने का मकसद भी क्या आपका मदद मांगने का ही है?
जी हां, मैंने हिंदुस्थानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यूएन में बलूचिस्तान के लिए समर्थन की गुहार लगाई है। हमें हिंदुस्थान से ही सबसे ज्यादा उम्मीदें हैं। प्रधानमंत्री का प्रयास हमें मुकम्मल देश की मान्यता दिलवाने में सहायता कर सकता है। मुझे पता है कि इस समय संयुक्त राष्ट्र में बलूचिस्तान के समर्थन में बोलने का हिंदुस्थान के पास बड़ा मौका है। इसी मकसद से मेरा हिंदुस्थान आना हुआ है। यहां मेरी बातों को गंभीरता से सुना गया है। हिंदुस्थान की विपक्षी पार्टियों से भी सहयोग की अपेक्षा है। सोनिया गांधी, राहुल गांधी जैसे बड़े कद के नेताओं को भी आगे आकर हमारी मदद करना चाहिए।
• हिंदुस्थान के हस्तक्षेप करने का मतलब है, सीधे-सीधे पाकिस्तान और चीन से पंगा लेना?
बदले हुए हिंदुस्थान की ताकत से दोनों मुल्क वाकिफ हैं। वरना, इंटरनल रिपोर्ट तो कई ऐसी हैं जिसमें पाक, चीन और तालिबानियों ने मिलकर हिंदुस्थान पर हमला करने की असफल योजनाएं कई मर्तबा बनाई थीं। जम्मू से धारा-३७० के हटने के बाद भी इन्होंने तैयारियां की थीं। लेकिन हिंदुस्थान पर चढ़ाई करने की हिम्मत नहीं हुई। पाकिस्तान को डर है कि कहीं हिंदुस्थान देर-सबेर पीओके यानी उनके अधिकृत कश्मीर पर भी न कब्जा कर ले। वो खुद अपने कश्मीर को बचाने में लगे हैं।
• अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी बलूची खबरें ज्यादा रिपोर्ट नहीं होतीं?
पूर्व में जो पाबंदियां लगी हैं। किसी विदेशी पत्रकार या न्यूज चैनल, सोशल वर्कर या डेलीगेट को जाने नहीं दिया जाता। स्थानीय मीडिया पर पाकिस्तान आर्मी का होल्ड है। उनके बिना इजाजत कोई सोशल मीडिया पर भी पोस्ट नहीं कर सकता। वो तो गनीमत यह है कि हमारी थोड़ी-बहुत आवाज बलूचिस्तान के बाहर हमारे समर्थक और चाहनेवाले सोशल मीडिया के जरिए उठाते हैं। वरना, संसार के लोगों को कुछ भी न पता चले। हमारी कनेक्टिविटी दुनिया के साथ पूरी तरह से कटी हुई है। मदद की तो बात दूर है, झांकने तक भी कोई नहीं आता।
• स्थानीय नागरिकों की सरकारी सेवाओं में भागीदारी है या नहीं?
बलूचों का वजूद अब और भी खतरे में है। सेना की भर्तियों, सरकारी नौकरियों व अन्य रोजगार धंधों में पाकिस्तानियों का कब्जा है। स्थानीयों पर प्रतिबंध लगा दिया है। बलूच के लोग खुलकर कोई चहलकदमी न करें, इसके लिए उनके आईएसआई के एजेंट मंडराते रहते हैं। उनको सबसे ज्यादा डर हिंदुस्थान से है कि कहीं उनकी दखलंदाजी तो नहीं हो रही, हम चुगली तो नहीं कर रहे। बलूचियों को पूरा विश्वास है कि हिंदुस्थान के हस्तक्षेप मात्र से ही पाकिस्तान की सेना पीछे हट जाएगी और हमारा आजादी की ओर कदम भी बढ़ जाएगा।

• बलूच महिलाओं की स्थिति सबसे ज्यादा खराब बताई जाती है?
पाक आर्मी के जवान किसी जवान लड़की को नहीं छोड़ते। उनका बलात्कार करते हैं, शरीर के साथ अमानवीय व्यवहार करके मार देते हैं। डर के चलते हम अपनी बच्चियों को घरों से बाहर नहीं जाने देते। बच्चियां स्कूल-कॉलेज भी नहीं जातीं। मजबूरन उन्हें तालीम भी घरों में ही दी जाती है। बलूच के बाजारों में आपको मर्द ही दिखाई देंगे या बुजुर्ग महिलाएं? कट्टरपंथी लोग भी उनका साथ देते हैं, मजहब के नाम पर बलूचियों को भड़काते हैं। उनके डर से कई बलूची तो उनके पाले में चले गए हैं। उनकी यातनाओं से तंग आकर बलूचिस्तान का बच्चा-बच्चा दहशतगर्दों और पाकिस्तान के अवैध कब्जे से अब आजाद होना चाहता है।
• अगर बलूचिस्तान आजाद मुल्क हुआ, तो आपके दिमाग में क्या योजनाएं हैं?
…अगर नहीं, बल्कि एक दिन बलूच आजाद होकर रहेगा। जिस दिन वो तारीख मुकर्रर होगी, दुनिया देखेगी, ये मुल्क न्यूक्लियर मुक्त रहेगा, आतंकवाद रहित बनेगा। सेक्युलर, प्रजातांत्रिक व्यवस्था वाला, सभी धर्म को माननेवाला और जेंडर बैलेंस्ड बनेगा हमारा प्यारा बलूच। बस उस सुबह का हमें इंतजार है। आजादी की लड़ाई लड़नेवाले हमारे कई क्रांतिकारी नेताओं को पाकिस्तान की सेना ने बंधक बनाया हुआ है। दरअसल, हमारी आवाज अब वैसे ही बुलंद हो चुकी है, जैसे कभी बंगालियों ने अपने लिए बांग्लादेश की मांग की थी।

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