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फिर सामने आया चीन का काला चेहरा!, ड्रैगन के अधिकारी करते हैं महिलाओं से अत्याचार

  • कुर्सी से बांध उइगर मुस्लिमों को दिया जाता है बिजली का शॉक
    एजेंसी / बीजिंग

    दुनिया के सामने चीन का क्रूरता भरा काला चेहरा एक बार फिर सामने आया है। ड्रैगन के अधिकारियों की वजह से उइगर मुस्लिम खौफजदा हैं। बताया गया है कि चीन के डिटेंशन कैंपों में उइगर मुस्लिमों को इलेक्ट्रिक कुर्सी से बांधकर बिजली का शॉक दिया जाता है। इतना ही नहीं, उन्हें ड्रग्स देने के साथ ही भूखों रखा जाता है। हद की बात तो ये है कि इन वैंâपों में अधिकारी महिलाओं के साथ बलात्कार करते हैं। साथ ही उन पर लगातार नजर रखते हैं और बिना कारण वैंâपों में बंद कर देते हैं। पहली बार उइगर मुस्लिमों पर जारी संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में ये खुलासा हुआ है। ४८ पन्नों की ये रिपोर्ट चीन पर मानवाधिकारों के हनन का गंभीर आरोप लगाती है।मिली जानकारी के अनुसार संयुक्त राष्ट्र ने इस रिपोर्ट के लिए इन कैंपों में बंद कई लोगों का इंटरव्यू किया। यहां उनके साथ हुई चौंकानेवाली घटनाएं लोगों ने बताई हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें `टाइगर चेयर’ पर बांधकर इलेक्ट्रिक बैटन यानी बिजली के डंडों से पीटा गया। लोगों ने यह भी बताया कि बिजली के डंडों से पीटने के दौरान उन पर पानी भी फेंका गया। उन्हें लंबे समय तक अकेले रखा गया। घंटों तक छोटे स्टूलों पर बैठने के लिए मजबूर किया गया। दो तिहाई से ज्यादा लोगों ने कहा कि डिटेंशन कैंपों में भेजने से पहले उन्हें पुलिस स्टेशनों में बंद रखा गया। यहां उन्हें टाइगर चेयर्स पर बांधकर पीटा गया।चीन से भागकर अमेरिका में रह रहीं तुर्सुने जियावुडुन ने अपने एक इंटरव्यू में बताया कि आधी रात के बाद वे हमारे सेल में आते। किसी लड़की को पसंद करते और ब्लैक रूम में ले जाते। उस रूम में कोई कैमरा नहीं होता था। हर रात लड़कियों को उनके सेल से निकालकर ले जाया जाता। एक या ज्यादा मास्क पहने हुए चीनी सैनिक उनका बलात्कार करते। तीन अलग-अलग मौकों पर तीन-चार लोगों ने जियावुडुन के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। यह सब उनके साथ इसलिए हुआ क्योंकि वे उइगर मुसलमान हैं। वहीं यूएन की रिपोर्ट ने इस तरह के डिटेंशन कैंपों में बलात्कार और यौन शोषण के आरोपों को सही पाया है। चीन के शिनजियांग इलाके में बड़े स्तर पर लोगों को मनमाने ढंग से गिरफ्तार किया जा रहा है। यहां उइगर मुसलमानों की एक बड़ी आबादी रहती है। इन लोगों को हाई-सिक्योरिटी फैसिलिटीज यानी डिटेंशन कैंपों में रखा जाता है। ये कब तक यहां रहेंगे इसकी कोई तय समय-सीमा नहीं है? चीन की सरकार आतंकी होने के शक पर लोगों को गिरफ्तार करती है। इसके पीछे वैसे तो कोई तर्क नहीं होता लेकिन कारण कुछ भी हो सकता है। संयुक्त राष्ट्र ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आतंकवाद के गंभीर या मामूली केसों और चरमपंथी कामों में कोई खास अंतर नहीं है। दोनों ही केसों में आरोपियों के साथ अक्सर एक जैसा व्यवहार किया जाता है।

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