मुख्यपृष्ठग्लैमर‘...तब इच्छा पूरी होती है! : स्वरा भास्कर

‘…तब इच्छा पूरी होती है! : स्वरा भास्कर

फिल्म ‘नील बटे सन्नाटा’, ‘रांझणा’, ‘वीरे दी वेडिंग’ जैसी फिल्मों में अपने बेहतरीन परफॉर्मेंस और अपने बेबाक बोलों के चलते स्वरा भास्कर हमेशा सुर्खियों में रही हैं। इन दिनों स्वरा अपनी फिल्म ‘मिसेस फलानी’ की वजह से चर्चा में हैं, जिसमें उन्होंने नौ कहानियों के लिए पूरा नौ किरदार निभाया है। पेश है, स्वरा भास्कर से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

  •  फिल्म ‘मिसेस फलानी’ के बारे में कुछ बताएंगी?
    मेरी फिल्म का टाइटल है ‘मिसेस फलानी’। हालांकि इस टाइटल से जाहिर नहीं होता कि फिल्म किस विषय से संबंधित है। मेरे लिए यह फिल्म बहुत बड़ी चुनौती होगी। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरे हिस्से इतने बड़े और मुश्किल ९ किरदार आएंगे। मेरे पैंâस मुझे ९ भिन्न किरदारों में देखकर चकित हो जाएंगे।
  • क्या इन ९ किरदारों का एक-दूसरे से कोई कनेक्शन है?
    इन ९ कहानियों में से एकाध कहानी की रूपरेखा के बारे में कहूं तो एक आठ-नौ साल की लड़की एक गाना देखती है, ‘मुझे नौलखा मंगा दे…’। इस गाने पर परफॉर्म करनेवाली हीरोइन का लिबास देखकर वो भी चाहती है कि वो वैसा लिबास पहने। एक बैकलेस चोलीनुमा लिबास को पहनने की इजाजत उस बच्ची के मां-बाप नहीं देते। वहीं शादी के बाद ससुरालवाले उसे ऐसा ड्रेस पहनने के लिए मना कर देते हैं क्योंकि उनके अनुसार ये ड्रेस भद्दा है। उस लड़की के बचपन की वो छोटी-सी इच्छा तब जाकर पूरी होती है, जब वो अधेड़ हो जाती है। इन किस्सों-कहानियों में देसीपन के साथ ही भावनाओं का समंदर है।
  • कुछ समय पूर्व एक अज्ञात धमकी में आपको जान से मारने की बात कही गई थी, उस मामले का आगे क्या हुआ?
    इस गंभीर धमकी की शिकायत मैंने खुद वर्सोवा पुलिस स्टेशन में जाकर दर्ज कराई थी। पता नहीं आगे क्या होगा? फिलहाल, तफ्तीश जारी है।
  • पिछले ३ महीनों से बॉलीवुड की फिल्मों के मुनाफा न कमा पाने का दौर कब तक चलेगा?
    कोरोना संकट के चलते पूरे दो वर्षों में बॉलीवुड ही नहीं, पूरी दुनिया उलट-पुलट हो चुकी है। विश्व भर में कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन की वजह से एक-एक परिवार को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। उस भयंकर दौर में फिल्में रिलीज नहीं हुईं और सभी ने घर बैठे ओटीटी प्लेटफॉर्म को चुना। बीते ढाई वर्षों से सभी को घर बैठे मनोरंजन भाने लगा, इससे थिएट्रिकल रिलीज को नुकसान तो होगा न।
  • इस समस्या से निजात कैसे मिलेगी?
    इस समस्या का एक ही हल है। फिल्म मेकर्स को अपने कंटेंट को गंभीरता से लेना होगा। पैन इंडियन फिल्में बनानी होंगी। जब तक दर्शकों को कोई जबरदस्त कहानी नजर नहीं आएगी, वे थिएटर में क्यों आएंगे भला? फिल्म देखने के लिए थिएटर में कोई अकेले नहीं, बल्कि परिवार सहित जाता है। परिवार सहित फिल्म देखने का मतलब है २ हजार रुपए खर्च होना। २ हजार खर्च करने पर उन्हें पैसा वसूल की भावना होनी तो चाहिए।
  • क्या सोशल मीडिया पर फिल्मों को बैन करने का ट्रेंड फिल्में फ्लॉप होने की वजह हो सकती है?
    दावे के साथ ये कहना बड़ा मुश्किल है। इसका न तो कोई ठोस तर्क है और न ही सबूत। कुछ फिल्मों पर निगेटिव पोस्ट्स मैंने सोशल मीडिया पर जरूर देखा था। अगर इसमें तथ्य है तो ये गलत बात है। अगर फिल्म में मनोरंजन नहीं है, घटिया फिल्म है तो बॉक्स ऑफिस पर उसका फ्लॉप होना समझ में आता है। लेकिन फिल्म रिलीज होने से पहले ही सोशल मीडिया पर उसे फ्लॉप कहना, निगेटिव बातें होना सही ट्रेंड नहीं है।
  • अपनी आनेवाली फिल्मों के बारे में बताएंगी?
    मैं ओटीटी प्लेटफॉर्म पर व्यस्त हूं। दर्शकों को यहां काफी दिलचस्प रोल और कहानियां देखने को मिलेंगी। ‘जहां चार यार’, ‘मिसेस फलानी’ ये २०२२ की रिलीजेस हैं। जी-५ के लिए वेब शो जल्द ही देखने को मिलेगा, जो बेहद रोमांचक है।

अन्य समाचार