मुख्यपृष्ठनए समाचार.. तो दिवालिया हो जाएगा महाराष्ट्र!

.. तो दिवालिया हो जाएगा महाराष्ट्र!

-`एक लाख करोड़ का बकाया! कैसे चुकाएगी सरकार?

-कर्ज का बोझ होगा `७ लाख करोड़ के पार… कर्ज के लिए जीडीपी में झोल

रामदिनेश यादव / नागपुर

राज्य की ‘घाती’ शिंदे सरकार जबसे आई है तबसे सरकारी खजाने को मनमाने तरीके से लुटा रही है। उसका परिणाम यह है कि राज्य की तिजोरी खाली हो गई है। राज्य की आर्थिक स्थिति गड़बड़ा गई है। शायद यही वजह है कि सरकार ने अबतक विभिन्न विकास कामों में लगे ठेकेदारों का २५ हजार करोड़ रुपए से अधिक बकाया रखा है अब ५४ हजार करोड़ रुपए की पूरक मांग का प्रस्ताव सिर पर है। किसानों को राहत देने सहित तमाम योजनाओं के लिए सरकार के पास पैसा नहीं बचा है। सूत्रों की मानें तो ऐसे विषयों से निपटने के लिए सरकार अब और कर्ज लेने की रणनीति बना रही है। पहले से ६.८० लाख करोड़ रुपए के कर्ज के बोझ तले दबी महाराष्ट्र सरकार अब कर्ज के ७ लाख करोड़ रुपए के आंकड़े को छूने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार सरकार ने जीडीपी को ३७ लाख दिखाकर अधिक कर्ज बटोरने के लिए ‘बाबुओं’ को तैनात किया है। जबकि असल जीडीपी ३३.५ के आसपास है। ऐसे में यह सरकार अपनी नाकामी छुपाने के लिए महाराष्ट्र को दिवालियापन की ओर लेकर जा रही है। ऐसा अंदेशा राजनीतिक जानकारों ने लगाया है।
बता दें कि राज्य की गद्दार ‘घाती’ सरकार ने पिछले दो वर्षों से अपने विधायकों का विश्वास जीतने के लिए एक हजार करोड़ रुपए का फंड आबंटित किया है। काम किस विधायक ने कितना किया है इसका आकलन नहीं हुआ है लेकिन उन्हें अपनी तरफ खींचने के लिए कई विधायक को हजार करोड़ रुपए तक की निधि दी गई है। ऐसे में राज्य की अन्य समस्यों के लिए सरकार के पास अब निधि नहीं बची है। इस बारे में विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार ने दोपहर का सामना प्रतिनिधि को जानकारी देते हुए कहा कि सरकार के खजाने में अब कुछ बचा नहीं है, शायद इसीलिए किसानों को राहत के लिए घोषित रकम अबतक नहीं मिली है। इस वर्ष फिर से किसानों की फसलें बर्बाद हो गई हैं। राज्य में जो ठेकदार और कंपनियां विभिन्न विकास काम कर रही हैं, उन्हें यदि समय पर पैसा नहीं मिला तो वे काम बंद कर देंगे। इसके अलावा कर्ज को चुकाने के लिए लगभग ५० हजार करोड़ रुपए कर्जदाताओं को दिया जाता है। सरकार के सामने बड़े खर्च हैं, उसमें अब पूरक मांग भी शामिल हो गई है। ऐसे में लगभग एक लाख करोड़ रुपए जरुरी खर्च सरकार के सामने हैं।
१० वर्षों में लगातार बढ़ता जा रहा है कर्ज
राज्य पर पिछले १० वर्षों में कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता गया है। अबतक यह आंकड़ा ६ लाख ८० हजार करोड़ हो गया है। जबकि १० साल पहले यह आंकड़ा २ लाख ६० हजार करोड़ रूपये था। एक दशक में लगभग तीन गुना कर्ज हो गया है। मनमाने खर्च से सकते में आई घाती सरकार अब ५० हजार करोड़ रुपए कर्ज लेने की योजना बना रही है। जल्द ही यह कर्ज लेकर सरकार राज्य की जनता पर कुल ७ लाख करोड़ रुपए से अधिक कर्ज थोपने का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर जाएगी।

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