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न किताबें हैं, न यूनिफॉर्म… कैसे पढ़ेंगे सरकारी स्कूलों के बच्चे?… शैक्षणिक वर्ष शुरू होने में तीन सप्ताह शेष

सुनील ओसवाल / मुंबई

राज्य में समग्र शिक्षा अभियान के तहत हर साल जिला परिषद और सहायता प्राप्त स्कूलों में कक्षा १ से कक्षा ८ तक के छात्रों को मुफ्त किताबें दी जाती हैं, पर इस साल इनका वितरण नहीं किया गया है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि पाठ्यपुस्तकों और यूनिफॉर्म के अभाव में सरकारी स्कूलों के बच्चे कैसे पढ़ेंगे?
बता दें कि स्कूल के पहले दिन विद्यार्थियों को पोशाक मिलने की संभावना अब धूमिल है, क्योंकि अभी तक कपड़ा नहीं खरीदा गया है। कहा जा रहा है कि किताबें स्कूल के पहले दिन वितरित की जाएंगी, लेकिन एक विश्वसनीय रिपोर्ट है कि इस वर्ष शिक्षा विभाग ने बालभारती की मांग के अनुसार, राज्य में पाठ्यपुस्तकों की आपूर्ति नहीं की है।
चूंकि मांग के अनुरूप किताबों की आपूर्ति नहीं हो पाई, ऐसे में शिक्षकों के बीच असमंजस की तस्वीर है क्योंकि स्कूल स्तर पर पाठ्यपुस्तकों की कमी होगी। शैक्षणिक वर्ष शुरू होने में सिर्फ तीन सप्ताह शेष बचे हैं। राज्य में १५ जून से स्कूल शुरू होंगे। समग्र शिक्षा अभियान के तहत जिला परिषदों, आश्रमशालाओं, सभी अनुदानित निजी स्कूलों में कक्षा १ से ८वीं तक के विद्यार्थियों को नि:शुल्क पाठ्यपुस्तक योजना का लाभ प्रदान किया जाता है। इसके तहत कक्षा १ से ८वीं तक बालक-बालिकाओं को दो-दो पोशाकें दी जाती हैं। इसके लिए कपड़ा सरकार ही खरीदती है। फिर उस कपड़े को पोशाक बनाने के लिए एक स्थानीय स्वयं सहायता समूह को दे दिया जाता है। इस साल चूंकि सरकार द्वारा अभी तक कपड़ा नहीं खरीदा गया है इसलिए स्कूल के पहले दिन छात्रों को वर्दी मिलने की संभावना कम है।

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