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नौकरी है, पर देने का नहीं! … मोदी राज में रोजगार भी बन गया जुमला

 केंद्र सरकार के अधीन १० लाख पद पड़े हैं रिक्त
 अकेले आयकर विभाग में खाली हैं १२ हजार पद
सामना संवाददाता / मुंबई
लोकसभा चुनाव की घोषणा कभी भी हो सकती है और इस चुनाव में बेरोजगारी मुख्य मुद्दा बनने वाला है। २०१४ में ही भाजपा ने हर साल दो करोड़ नौकरियां देने का वादा करके सत्ता हासिल की थी। पर वह सिर्फ जुमला साबित हुआ। युवाओं को नौकरियां मिली नहीं और देश में बेरोजगारी बढ़ती चली गई। आश्चर्य की बात है कि गत वर्ष मानसून सत्र के दौरान केंद्र सरकार ने राज्यसभा में खुद स्वीकार किया था कि केंद्र सरकार की नौकरियों में करीब २५ प्रतिशत पद खाली हैं। यानी सरकार का हाल है कि नौकरी है, पर देने का नहीं। हालांकि, उसके बाद केंद्र सरकार ने कुछ नियुक्तियां की हैं और पीएम मोदी ने खुद लाइव आकर नियुक्ति पत्र बांटे हैं, पर बेरोजगारों की भारी संख्या को देखते हुए ये नाकाफी हैं।
हैरानी की बात है कि किसी एक विभाग में नहीं बल्कि सरकार के लगभग हर विभाग में पद रिक्त हैं। केंद्र सरकार इन नौकरियों में बहाली के प्रति कितना गंभीर है, यह इसी से समझा जा सकता है कि सरकार के लिए राजस्व जुटानेवाले इनकम टैक्स विभाग में ही करीब १२,००० पद रिक्त पड़े हुए हैं। ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा बेरोजगारी दूर करने की बात करना जुमला नहीं तो और क्या है? गौरतलब है कि केंद्र सरकार में ४० लाख से अधिक स्वीकृत पद हैं, जिनमें ३० लाख से अधिक कर्मचारी काम कर रहे हैं। मानसून सत्र में सरकार ने जो जानकारी दी थी, उसके अनुसार, करीब १० लाख से अधिक पद वर्तमान में खाली हैं।
केंद्र सरकार के जिन विभागों में पद खाली हैं उनमें सिविल सेवा क्षेत्र में, भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में १,३६५ और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में ७०३ रिक्तियां हैं। इसके अतिरिक्त, जैसा कि केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा था, भारतीय वन सेवा (आईएफएस) में १,०४२ और भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) में ३०१ रिक्तियां हैं। गृह मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, सीआरपीएफ, बीएसएफ और दिल्ली पुलिस समेत विभिन्न संगठनों में १,१४,२४५ पद खाली थे। ये रिक्तियां विभिन्न समूहों में वितरित की गई हैं। समूह ‘ए’ में ३,०७५, समूह ‘बी’ में १५,८६१ और समूह ‘सी’ में ९५,३०९ रिक्तियां हैं। इसी तरह रेलवे में रिक्तियों की एक बड़ी संख्या है, १ जुलाई, २०२३ तक २.६३ लाख से अधिक पद खाली थे। इनमें से ५३,१७८ परिचालन सुरक्षा श्रेणियों में हैं। हालांकि, इसके बाद बड़े पैमाने पर भर्ती प्रक्रिया पूरी की गई है, जिसमें १,३९,०५० उम्मीदवारों को सूचीबद्ध किया गया है।
व्यय विभाग के वेतन अनुसंधान इकाई (पीआरयू) की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, १ मार्च २०२२ तक केंद्र सरकार में ग्रेड ‘ए’, ‘बी’ और ‘सी’ में कर्मचारियों की संख्या क्रमश: १,०८,०९९ है, २,९२,११७ और २६,१२,९३४ हैं। इसी तरह १ अप्रैल, २०१८ से ३१ मार्च, २०२३ तक, यूपीएससी, एसएससी और आरआरबी ने केंद्र सरकार में नियुक्ति के लिए ४,६३,२०५ उम्मीदवारों की सिफारिश की। अकेले २०२३-२४ की पहली तिमाही में एसएससी और आरआरबी ने नियुक्ति के लिए १,०३,१९६ उम्मीदवारों की सिफारिश की थी। केंद्र सरकार के लिए राजस्व जुटानेवाला सबसे प्रमुख विभाग है इनकम टैक्स विभाग। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन नितिन गुप्ता ने कहा है कि आयकर विभाग में १०,००० से १२,००० तक कर्मचारियों की कमी है और खाली पड़े पदों पर नियुक्ति के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अंतरिम बजट में २५,००० रुपए तक की बकाया कर मांग को वापस लेने की घोषणा के तहत करदाताओं को एक लाख रुपए तक की राहत मिल सकती है। इससे उन करदाताओं को लाभ होगा होगा, जिन्हें निर्धारित अवधि में एक साल से अधिक के लिए कर मांग को लेकर नोटिस मिले हैं।

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