मुख्यपृष्ठग्लैमर‘दिल में एक बेचैनी-सी रहती है!’ : शेफाली शाह

‘दिल में एक बेचैनी-सी रहती है!’ : शेफाली शाह

जाने-माने फिल्म मेकर विपुल शाह की पत्नी शेफाली शाह ने अपने करियर में कुछ अच्छी फिल्मों में भी काम किया है। लेकिन ये सच्चाई है कि उनके टैलेंट का बेहतर इस्तेमाल ओटीटी प्लेटफॉर्म पर हुआ है। ‘ह्यूमन’ और ‘दिल्ली क्राइम’ जैसे शोज ने जहां उन्हें एक पॉवरपुâल अभिनेत्री के रूप में पहचान दी, वहीं नेटफ्लिक्स की फिल्म ‘डार्लिंग्ज’ में वे आलिया भट्ट की मां के रूप में नजर आ रही हैं। पेश है, शेफाली शाह से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

  • फिल्म ‘डार्लिंग्ज’ के लिए आपने किस प्रकार की तैयारियां कीं?
    ‘जब तक मैं कैमरे के सामने नहीं जाती मुझ पर न जाने वैâसा प्रेशर रहता है? मैं तनाव में रहती हूं और सोचती हूं कि क्या मैं अच्छा परफॉर्म कर पाऊंगी? मेरे दिल में एक बेचैनी-सी रहती है, जबकि डायरेक्टर मुझसे कहते हैं कि आप हर शॉट बहुत अलग तरीके से देती हैं। फिल्म ‘डार्लिंग्ज’ के लिए मैंने मुंबई के भायखला इलाके में रहनेवाले मुस्लिम किस अंदाज में बोलते हैं, इसकी प्रैक्टिस जरूर की।
  • आपने आलिया भट्ट की मां बनना वैâसे स्वीकार किया?
    मेरा यह दावा कभी नहीं था कि मैं मां का किरदार नहीं कर सकती। वर्षों पहले मैंने फिल्म ‘वक्त-द रेस अगेंस्ट टाइम’ में अक्षय कुमार की मां और अमित जी (अमिताभ बच्चन) की पत्नी का किरदार निभाया था। मेरे ऑन स्क्रीन बेटे (अक्षय) की उम्र असलियत में मुझसे ज्यादा है। फिल्म में मां बनने में मुझे कोई दिक्कत नहीं है, बशर्ते मेरा किरदार सशक्त हो।
  • कैसा  रहा आलिया के साथ काम करना?
    बहुत ही खास रहा आलिया के साथ काम करना। हम दोनों सेट पर खूब हंसते थे। कई बार हमारी ठहाकों वाली हंसी से शूटिंग रुक जाती थी, जबकि सीन गंभीर हुआ करते थे। आलिया फिल्म ‘डार्लिंग्स’ की निर्मात्री भी हैं। कम उम्र में आलिया सफल अभिनेत्री के साथ ही निर्मात्री भी बन चुकी हैं। बहुत बारीकी से वो हर काम सीख रही हैं कि वैâमरे में किस लेंस का प्रयोग किया जा रहा है, किस एंगल से शॉट लिया जा रहा है। आलिया पर मुझे फख महसूस होता है।
  • क्या आप स्विच ऑन और स्विच ऑफ पर विश्वास करती हैं?
    मैं पहले मॉनिटर देखा करती थी लेकिन अब मैंने ये आदत बंद कर दी है। नेचुरल परफॉर्म करो लेकिन किरदारों को मन में कैद न करो। अपने घरों तक अपने किरदारों को न ले जाएं। किरदारों के साथ जीना नहीं, उन्हें वहीं छोड़ देना है। स्विच ऑन और स्विच ऑफ होना बहुत जरूरी है।
  • क्या आपको महिला निर्देशक के साथ परफॉर्म करना ज्यादा सुविधाजनक लगता है?
    ऐसा कुछ भी नहीं है। महिला निर्देशक पुरुष निर्देशकों से बेहतर होती हैं और महिला कलाकारों को उनके निर्देशन में काम करना अधिक सुविधाजनक है, ऐसा कहना पुरुष निर्देशकों पर अन्याय करने जैसा है। हालांकि उभरती निर्देशक जसमीत रीन नई हैं लेकिन उन्हें ये अच्छी तरह पता है कि उन्हें किस तरह कलाकारों से काम लेना है। निर्देशक में सेंसिटिविटी होनी चाहिए, ताकि वो कहानी और कलाकारों के साथ न्याय कर पाएं।
  • महिला कलाकारों के लिए क्या यह सही वक्त है?
    टीवी, फिल्म्स और ओटीटी तीनों माध्यमों में महिला कलाकारों को टक्कर के रोल मिल रहे हैं। हर महिला कलाकार इस समय बहुत व्यस्त हैं। आज से ५ वर्ष पहले क्या किसी ने सोचा था कि मुझ जैसी ४० वर्ष पार कर चुकी कलाकार ‘दिल्ली क्राइम’ के बाद बहुत व्यस्त हो जाएगी और अगले प्रोजेक्ट्स के लिए मेरी डेट्स मिलना असंभव होगा। ‘दिल्ली क्राइम’ शो ने मेरी जिंदगी बदल दी। सफलता के साथ मुझे अब मनचाहे रोल मिलने लगे हैं, जो बॉलीवुड में बरसों काम करने के बाद भी नहीं मिले।

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