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राज्य में जेंडर चेंज सर्जरी के लिए नहीं है कोई सब्सिडी … किसी भी सरकारी योजना में नहीं है शामिल

 निजी अस्पतालों में करने पड़ते हैं लाखों रुपए खर्च
 निराशा का सामना कर रहे ट्रांसजेंडर

सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र में जेंडर चेंज सर्जरी के लिए कोई सब्सिडी नहीं है। इसलिए इसे किसी भी सरकारी योजना में शामिल नहीं किया गया है। दूसरी तरफ इस सर्जरी के लिए निजी अस्पतालों में लाखों रुपए खर्च होते हैं। इस सर्जरी की सबसे अधिक आवश्यकता ट्रांसजेंडरों को होती है। ऐसे में जेंडर चेंज सर्जरी के लिए सब्सिडी न शुरू होने से ट्रांसजेंडरों को इससे वंचित रहना पड़ रहा है। आलम यह है कि उन्हें कई बार निराशा का सामना भी करना पड़ रहा है। इसके बावजूद उनकी इस समस्या को लेकर राज्य की मौजूदा सरकार उदासीन है।
उल्लेखनीय है कि जेंडर चेंज सर्जरी से पहले काउंसलिंग जरूरी होती है। इसके साथ ही वास्तविक सर्जरी और सर्जरी के बाद के इलाज दोनों की आवश्यकता होती है। इसमें डेढ़ से दो महीने का समय लगता है और पूरी प्रक्रिया में करीब ३ से ५ लाख का खर्च आता है। फिलहाल, ‘घाती’ सरकार के शासन में इस सर्जरी पर अभी तक किसी तरह की कोई सब्सिडी नहीं मिलती है। महात्मा फुले जन आरोग्य योजना, आयुष्मान भारत योजना या मुख्यमंत्री सहायता कोष से कोई वित्तीय सहायता उपलब्ध नहीं है। इसलिए कई मामलों में किन्नरों को यह सर्जरी निजी अस्पतालों में करानी पड़ती है।
दो साल पहले यह घोषणा की गई थी कि लिंग परिवर्तन सर्जरी को आयुष्मान भारत योजना में शामिल किया जाएगा। इसी तरह रोगी मित्रों ने यह भी मांग की है कि अंग प्रत्यारोपण श्रेणी के मानदंड लागू करके महात्मा ज्योतिबा फुले जन आरोग्य योजना या मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता इकाई के माध्यम से लिंग पुनर्मूल्यांकन सर्जरी में सहायता दी जानी चाहिए।
ऐसे होती है सर्जरी
ट्रांसजेंडर उपचार वर्ल्ड प्रोफेशनल एसोसिएशन फॉर ट्रांसजेंडर हेल्थ मानकों के अनुसार, किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में मनोवैज्ञानिक परीक्षण महत्वपूर्ण है। किन्नरों का व्यवहार व्यक्ति विरुद्ध जैसा होता है। मेडिकल भाषा में ऐसे व्यक्ति को ‘जेंडर डिस्फोरिया’ कहा जाता है। मनोवैज्ञानिक परीक्षण में ‘जेंडर डिस्फोरिया’ साबित होने के बाद आगे का इलाज शुरू होता है।

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