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१२वीं, १०वीं बोर्ड परीक्षा में पड़ सकता है विघ्न!… शिक्षण संस्थानों के संचालक कर सकते हैं बहिष्कार

सामना संवाददाता / मुंबई

महाराष्ट्र में शिक्षकों की भर्ती न होने, शिक्षणेत्तर पद बड़ी संख्या में रिक्त होने, सरकार से मिलनेवाली शिक्षणेत्तर अनुदान के बकाया होने जैसे कारणों से स्वूâल और शैक्षणिक संस्थान खस्ताहाल हैं। इससे शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट आई है। इस तरह के आरोप लगाते हुए प्रदेश भर के शिक्षण संस्थानों के संचालकों ने कहा है कि जब तक सरकार हमारी प्रलंबित मांगों का लेकरे पैâसला नहीं लेती और बकाए सब्सिडी नहीं देती, तब तक हम १०वीं-१२वीं की परीक्षा के लिए अपने स्वूâलों को परीक्षा केंद्र के तौर पर नहीं देंगे। इतना ही नहीं परीक्षा के कामों के लिए कर्मचारी भी नहीं देंगे। महाराष्ट्र राज्य शिक्षण संस्था महामंडल की तरफ से कहा गया है कि प्रदेश भर के शिक्षण संस्थानों के संचालक १०वीं और १२वीं की परीक्षाओं का बहिष्कार करने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में महाराष्ट्र में अगले माह से शुरू होनेवाली १०वीं और १२वीं की परीक्षाओं में बाधा आने की संभावना अभी से ही जताई जाने लगी है।
शिक्षण संस्थानों के संचालकों ने कहा है कि अगर सरकार हमारे स्वूâलों पर जबरन कब्जा कर परीक्षा केंद्र बनाने की कोशिश करेगी, तो हम स्कूलों में ताला लगा देंगे। महाराष्ट्र राज्य शिक्षण संस्था महामंडल के कार्यवाहक रवींद्र फडणवीस ने कहा है कि महामंडल ने यह रुख अपनाया है कि स्वूâलों को परीक्षा केंद्र के रूप में उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। उन्होंने कहा है कि राज्य के सभी स्वूâलों में शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के पद बड़े पैमाने पर खाली हैं। साल २०१२ के बाद से अभी तक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया नहीं की गई है, इसे तुरंत किया जाए।

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